शुक्रवार, 26 अगस्त 2011
पहले मै भारत की उस वीरप्रसुता नारी को प्रणाम करता हूँ जिसने लज्जा और मर्यादा को अपने साथ आँगिकार कर देश को महासपूत दिये अब मै उस आधुनिक नारी को तिँलाजली देता हु जो नारी समाज को पश्चिमी संस्कृति मे धकेलने मे प्रयास रत है आज वो इतनि मार्डन हो ग ई है कि वो सुँदरी कम काम सुंदरी ज्यादा हो ग ई है और भारतिय संस्कृति का बदन उघाड़ने के लिये आतुर है और हमारा महिला आयोग उनका सर्मथन करता है आज कल एक मोर्चे की बड़ी चर्चा है बेशर्मी मोर्चा जो कनाडा के टोँरटो से निकल कर हमारे भारत मे कब आ गया ये पता ही नही चला ओर नारी जगत ने अनुसरण मी कर लिया और भारतिय समाज मे अपने अधिकर का ढिँढोरा पीटते हुये एक न ई विचार धार को जन्म दिया जो नारी को और अधिक उन्मुक्त और बे शर्म बना रहा है ये आधुनिक कामकन्याये नारी को कौन सी दिशा दे रही है आज नारी को किसी बेशर्मी मोर्चे की नही बल्कि उस मोर्चे कि अवश्तकता है जो उन्है भारतीय पंरपरा के साथ अपने मूलभूत अधिकार और स्थिती को सुधारने की अवशयकता है आज भी मध्यम और निम्न वर्गीय महिलाऐ शोषण ओर अधिकारो से वँचित है और दहेज हत्या जैसे वीभत्स पीड़ा झेल रही है इसके विपरित आधुनिक कन्याओ का बेशर्मी मोर्चा क्या सँकेत देता है और क ई NGO बेशर्मी मोर्चे को नारी कि जागरूकता बता रहै है आज भारत कि नारी को संविधान ने जो बराबर का हक दिया है उसका उपयोग कम दुरपयोग ज्यादा हो रहा आज भारत कि नारी को सम्मान तभी मिलेगा जब वह आधुनिकता के साथ साथ भारतीय परँपरा के साथ चलेगी जय हिँद
गुरुवार, 25 अगस्त 2011
भारत के स्वंतत्रा संग्राम मेँ हमारे कुछ राष्ट्रवादि लोगो ने एक सनातनी हिँदु राष्ट्र कि कल्पना कि थी और अधिकाश इस का समर्थन भी करते थे किँतु कुछ सेकुलर वादि लोगो ने सत्ता प्राप्ति के लक्ष्य मे अंग्रेजो से मिल कर हिन्दु राष्ट्र वादियो को ना सिर्फ समाज से बाहर का रास्ता दिखा दिया अपितु इतिहास मे भी उन्हे गुमनामी के अंधेरो मे धकेल कर अपने को सच्चा देशभक्त घोषित कर दिया हेडगेवार सावरकर मदन लाल ढीँगरा जैसे महापुरुषो को मृत्युपोँरात भी सम्मान ना दे सके आज भी हमारी पीढी इनके संर्घषमय जीवन से अंजान है खादी धारियो कि इस बेईमानी का हमने कभी विरोध नही किया यहाँ तक कि इन वीरो ने हिन्दु राष्ट्र कि कल्पना के साथ अपने प्राण दे दिये लेकिन हम हिँदु विघटित होते रहे जाति और श्रेष्ठता मेँ बँट कर हम टूटते चले गये और साथ हि एक हिन्दु राष्ट्र की नीँव जो अभी कमजोर ही थी उसको ध्वस्त कर एक क ई कमरो वाली सेकुलर इमारत खड़ी कर दि और सेकुलर हिन्दुत्तव को नीचा दिखाने लगा इस इमारत मे हिँदुत्तव का झंडा लिये कुछ ऐसे भी है जो सिर्फ चंदा लेने और हिन्दु को उग्र कर भड़काने जैसा कार्य ही कर रहे है लेकिन हिँदुऔ की एकता के विषय मे ये कुछ नही करते आज दूसरे धर्म के लोग हमारे धर्म मे विश्वास नही करते इसका प्रमुख कारण है हमारे वे हिन्दु संगठन जो राम मंदिर और हिन्दु राष्ट्र मुद्दो मे भी हित तलाश रहे है आज हर हिन्दू को जागना ही पडेगा और उसे एकता मे ही रहना होगा भारत मे रहने वाला हर वयक्ति हिँदु है चाहे वो किसी भी धर्म को मानता हो यह उसे स्वीकारना होगा और वो ये जान ले हिन्दु धर्म ही सनातन परपँरा है एक उतकृष्ट विचारधारा है अगर हम अब भी नही जागे तो हिँदु राष्ट्र कि कल्पना तो दूर बाबर और गजनी फिर से देश लूटने आयेगे तो आप क्या करेगे जंय हिँद
बुधवार, 24 अगस्त 2011
ये लेख किसी धर्म भावना को ठेस पहुचाना नही है ये लेख उस दिशा की और अवगत कराना है जो राष्ट्र भक्ति कि बात करते है लेकिन राष्ट्र निमार्ण मे कोई भूमिका नही निभा रहे है कहने को देवबंद इस्लामी शिक्षा का केँद्र है और विश्व मे उसका अपना नाम है लेकिन उसका नकारात्मक पहलू है वेबजह फतवे जारी करना जो की मुस्लिमो कि राष्ट्र भावना मे शंका पैदा करते है उसका ये कहना कि हम मुस्लिमो को वंदेमातर नही गाना चाहिये औरना ही भारत माता कि जय जब्कि मुस्लिम पँडित जाकिर नाइक ने कभी मुस्लिम को ये नही कहा है लेकिन देवबंद को एक सच्चे भारतीय मुस्लमान को वंदेमातरम कहने मे क्या आपत्ती है अब दूसरा पहलू है राम मंदिर के विषय को लेकर जब हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया जो की न्यायसंगत था और जजो के पैनल मे भी एक मुस्लिम जज थे उनके दिये गये फैसले पर उन्होने कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नही दी और ना ही फैसले को उचित बताया जब्कि देवबंद का ये फर्ज था कि वो सारे मुस्लिम समाज को समझाति कि फैसला सही है जिसका परिणाम ये है मामला सुप्रिम कोर्ट मेँ पहुँच गया अगर देवबंद मुस्लिम हितैषी होती तो बाबरि मस्जिद कमेटी को समझाती लेकिन उसने ऐसा ना कर के अपने को राजनीति से परे बता दिया तीसरा पहलू देवबंद राष्ट्रवादी मुस्लिमो मे भेद भाव रखता है और क ई विद्वानो को अपने पद से बे वजह हटा देता है देबबंद को अपना इतिहास नही भूलना चहिये देबबंद की भी आजादी कि लड़ाई मे योगदान था इसलिये देवबंद से आग्रहै भारत के मुसलमान को कट्टरता का नही देश भक्ति का पाठ पढाये जय हिँद
भगवा पर आँतकी रंग एक साजिश
हमारे तिँरगे मे तीन रंग है तीनो की अलग अलग महिमा गढी है संविधान ने केसरिया ( भगवा ) को त्याग और वीरता का प्रतीक बताया लेकिन भगवा हिन्दू कि आत्मा भी है ये कुछ सेकुलरवादी कीड़े भगवा पर आंतकवादी लेबल लगाने का प्रयास कर रहो जिसका सीधा अर्थ हिन्दू संस्कृति पर कालिख पोतना है जब्कि सफेद और हरे रंग को लेकर कभी अपना मुह नही खोला जो कि सबसे घृणित धर्मान्तरण और आँतकवाद फैलाने कार्यो मैँ लिप्त है लेकिन मुस्लिम समाज ने इस पर कभी प्रतिक्रिया नही दी इसका क्या ये अर्थ निकाले कि वो काफिर हि मानते है और भारत को अपनी मातृभूमि नही मानते है लेकिन ये सच नही है मस्लिम भाई अपने धर्म के प्रति कट्टर जरूर है किँतु देश भक्ति कि भावना उतनि प्रबल नही है जितनी अशफाक जी इंकबाल और बहादूरशाह जफर मे थी लेकिन मुस्लिम भाई इन्हे अपना आदर्श नही मानते इसका कारण हमारे हि वो लोग है जो हिँदू का तमगा लगा कर हिन्दू समाज को ओछा और साँप्रदायिक चेहरा पेश कर सिर्फ सत्ता पाने कि जुगत मै है और भगवा को आंतकि रंग देकर उसे भी उस श्रेणी मे खड़ा करने का प्रयास कर रहे है जहाँ आज पाक्सितान है इन कुटिल राजनेता ओ को देशभक्त कहलाने का कोई अधिकार नही है आज हर वर्ग को उठ कर आगे आकर एक सर्व गुण संपन्न राष्ट कि नीँव रखनी होगी और भारत को एक सनातन पंरपरा से युक्त हिँदु राष्ट्र निमार्ण कि भावना जागृत करनी होगी जर हिँद
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