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सोमवार, 21 नवंबर 2011

देश को मत तोड़ो


उत्तर प्रदेश की माया सरकार सत्ता की इतनी भूखी हो गई की अपने प्रदेश को ही खंड खंड करने पर तुली है ओर विश्वास प्रस्ताव भी पारित कर दिया क्या देश को तोड़ कर विकास किया जा सकता हे देश पर आर्थिक बोझ लादने के सिवाय कुछ हासिल नहीं होगा ये राजनीती की जड़े गहरी करने की साजिश लगती हे अगर चार नए राज्यों का गठन हो जाता हे तो किसी एक राज्य पर माया सरकार काबिज़ हो ही जाएगी राज्यों का विकास न कर के उन्हें तोडना देशद्रोह से कम नहीं लेकिन भ्रष्टाचार के लिए सडको पर उतरने वाला युवा इस मुद्दे को लेकर चुप क्यों हे अगर इसे ही देश टूटता रहा तो अखंड भारत का सपना कभी पूरा न होगा और क्षेत्रवाद को बढावा मिलेगा भारतीय एकता में क्षेत्रवाद एक गंभीर समस्या हे अगर नए राज्य बनाना जरूरी हे तो सरकार को जनमत करना चाहिए क्यों की लोकतंत्र सबसे ऊँचा हे लेकिन सत्ता के पुजारी लोकत्रंत की कब्र खोदने पर तुले है अगर राज्यो का निमार्ण जरुरी है तो संस्कृति विरासत को बचाने के लिये नये राज्य बनाना उचित है बुँदेल खंड गोँडवाना तेंलागना जैसे राज्यो की मांग को लेकर कभी केँन्द्र गंभीर नही हुआ और बंद औ आंदोलन की मार से राज्य पीड़ित है जबकी ये माँगे जायज और जन समर्थित है इसके विपरित जो माया सरकार जो चार राज्यो के गठन का सपना देख रही है वो जनता की माँग नही सत्ता लोलुपता का विकृत चेहरा है क्योकी अगर माया सरकार चहाती तो चार राज्यो की बजाये सिर्फ बुंदेलखंड की बात करती तो उनकी ईमानदारी दिखती लेकिन वे ऐसा नही कर रही अगर इस तरह राज्यो की माँग उठती रही तो भविष्य मे सक्षम राज्य स्वतंत्र राष्ट्र के लिये गृह युद्ध के लिये बाध्य हो सकते है इस लिये राजनीतिज्ञो को क्षेत्रवाद की भावना को त्याग कर राष्टवाद को अपनाना चाहिये खंड खड टूटते भारत को अंखड भारत कैसे निमार्ण हो इस पर विचार और एकता संगठित करना चाहिये ...जय भारत

गुरुवार, 17 नवंबर 2011

हिँदुत्तव- एक सदभार विचार धारा


भारत मे सेकुलर वादियो की अंधी सोच हिँदुतत्व को एक वर्ग मे बाँटती है जिसका आधार सांप्रदायिकता पर होता है मतलब हिँदुतत्व एक लड़ाकू और नागरिको मै वैमनस्य फैलाने वाला धर्म है और सेकुलरवादियो का एक मत यह भी है ईसाई और मुस्लिम ही शांतिप्रिय कौम है और उसे सहानुभूति की जरूरत है सेकुलरवादियो की यह सोच भारत के संविधान मे दर्ज धर्मनिरपेक्षता वाक्य को मिथ्या सिद्ध करती है आज भी हिँदुतत्व को ये सेकुलर वादी जान नही पाये हिँदुतत्व आस्था और विज्ञान के पलड़ो पर टिका है बिलकुम समतल आस्था और वैज्ञानिक दृष्टिकोण हिँदुतत्व जीवन शैली मैँ ही मिलता है और किसी धर्म मेँ नही वंसुधैव कुंटुबकम की पंक्ति इसका ठोस प्रमाण है इस्लाम को शांती और भाईचारा का प्रतिक बताने वाले ये भूल गये सर्वे भंवन्तु सुंखिनः इस्लाम के उदय से कई वर्ष पहले लिखा गया है और फिर भी सेकुलर वादी हिँदुतत्व पर उंगली उठाते है हिँदुतत्व पंरपरा पर गौर करे तो वैज्ञानिक तथ्य पूरे उतरते है माथे पर तिलक लगाना सूर्य को जल चढाना व्रत आदी भी मैँ भी विज्ञान पूरी तरह सहमत है सुबह योग भी विज्ञान ही है आर्युवेद विज्ञान ही है पंच गव्य की महिमा को विज्ञान स्वीकारता है इतने गुण हिँदुतत्व मे है फिर भी हिँदुतत्व कमजोर पढ़ता है ईसाइ और मुस्लिम अपनी डीँग हाँककर धर्मातरण कर ही रहे है और सेकुलरवादि इस लिये चुप है आखिर ये सत्ता की चाबी है इनको नाराज मत करो ऐसे नंपुसको के कारण हिँदुतत्व की आज ये गति है जिस डाल पे बैठे उसे ही काट रहे है और कुछ मक्कार धर्मातरण करते जा रहै है ये स्थिती बदलना जरूरी है जागरूकता की कमी के चलते हिँदु हिँदुतत्व से दूर हो गया है ऐसे मे अंखड भारत की बाते बेमानी है सेकुलरवादियो को सच्ची धर्मनिरपेक्षता निभाना चाहिये और सनातन संस्कृति मे ही सच्ची धर्म निरपेक्षता है जय माँ भारती

सोमवार, 14 नवंबर 2011

कामगार बच्चे और बालदिवस


आज बालदिवस है केवल उनके लिये जो मंहगे अंग्रेजी स्कूल मे पढते है साफ और मंहगी पतलून टाई पहनते है आज उनका बालदिवस है जो पिज्जा बर्गर कोला पीते है जिनके घरो मे खिलौने दो घड़ी जिवित रहते है और नये आ जाते है बाल दिवस कुछ के लिये काला दिवस भी है लेकिन ये बात वो नही समझते जो योजनाओ के दिये जलाते है और तेल डालना भूल जाते है कुपोषण से दुर्बल बचपन मे बालदिवस खोजने की कोशिश नही की कभी पटाखो की बारूदी हवा मे सर्घष बचपन पर चढी धूल झाड़ने की कोशिश नही की मिटटी गारे मे सने बालपन को जरा करीब से देखो उसके मन मे भी लालसाये जीवित है शिक्षा के अधिकार क्या है ये दो जून की रोटी की जुगाड़ मे ही वयस्त है इनका गुड डे मील सूखी रोटी है योजनाओ की थाली भले सरकार सजा लेँ किँतु योजन पकवान को भोगने का अधिकार इन कामकार बाल मजदूरो का अधिकार नही बन सका ये योजना आयोग की विफलता है और कुछ समाजवादी समाज सेवको की जो अपनी झूठी समाज सेवा कर प्रतिष्ठा की चाह रखते हुये कार्य करते है आज भी हमे सड़को पर बूट पालिश या गुब्बारा बेचते मासूमो की आँखो मे यही प्रशन दिखता है की टाईधारी मे और हम मे क्या फर्क है आखिर योजनाऐ हमारे पास क्यो नही आती भारत निमार्ण विज्ञापन और यथार्थ मेँ बड़ा फर्क है ये राजनेताओ और समाजसेवियो को समझना चाहिये बच्चो को बेशक हम देश का भविष्य कहे लेकिन इस भविष्य को अंधेरे मे जाते हुये देखते रहते है एन जी ओ एंव नागरिको को कामकार बच्चो का स्तर सुधारने मे तत्परता से आगे आना चाहिये ताकी वे भी बालदिवस मना सके तभी अंखड भारत का निर्माण संभव है

रविवार, 13 नवंबर 2011

ये कैसी देशसेवा

आज का युवा अपने कैरियर और उच्च आंकाक्षा के मोह मे देशसेवा की परिभाषा को भूल चुका है और देशसेवा के मायने उसने बदल डाले है आज का युवा चहाता है किसी मल्टीनेशनल कंपनी मेँ उँची तनख्हा हो उँचा पद हो और समाज मे वो स्टैर्न्डड जीवन शैली जिये जो ऐसे विचारो से पोषित होगा उसके लिये देशसेवा एक चुनौति भरा कार्य होगा क्योकी देशसेवा के लिये आपको वातनुकुलित डिब्बेनुमा कमरे मे बैठ कर देशसेवा नही की जा सकती देशसेवा की भावना तब ही आती है जब आप मिट्टी मे सने हो और पसीने मे लथपथ मतलब कर्मशील हो कई युवा सरकारी सेवा मे है कहते है मैँ देशसेवा कर रहा हुँ ये उनकी कैसी देशसेवा है जिनकी जड़ो मे भ्रष्टाचार की खरपतवार फल फूल रही यह उसकी देशसेवा ना हो कर स्वमसेवा है देशसेवा तब होती जब वे अपना काम पूरी इमानदारी और नियमनुसार करते तो ये कैसे देशसेवक एक स्लोगन मैँ हमेशा थाने मे पढता रहता हुँ देशभक्ति जनसेवा लेकिन ये बात पुलिस पर झूठी बैठती है या यू कहे वे देशभक्ति नही स्वमशक्ति जानलेवा क्योकी पुलिस विभाग से अपराधी कम नागरिक ज्यादा डरते है थाने मे नोटो का बोलबाला है कितनी शर्म की बात है इनके लिये क्यो की नागरिक इन्हे कुत्ता ठुल्ला जैसी श्रेणीयो मे रखते है क्या ऐसा विभाग देशसेवा कर रहा है लेकिन लोकतंत्र चुप है वो इनसे उलझना नही चहाता अब आपको सरकारी अस्पताल लिये चलता हुँ जहाँ डाँक्टर तब तक नही आते जब तक भीड़ ना हो वार्ड वाय से लेकर स्वीपर तक अपने को यहा सर्वोसवा मानता है जीवनरक्षक उपकरणो पर धूल चढी है दवाओ का सुराग नही मिल रहा कुल मिलाकर अस्पताल खुद आपातकालीन स्थिती मे है और कलयुग का भगवान पूरा वेतन इमानदारी से ले कर देशसेवा कर रहे है ये मक्कार जब ऐसी देशसेवा करेगे तो देश गर्त मे ही जायेगा आप क्या कहते है ..जय अंखड भारत