Zee News Hindi: Latest News

सोमवार, 5 सितंबर 2011

अल्पसंख्यक नही देशभक्त बनो


अंखड भारत कि कल्पना कोई आज की नही है वर्षो पुरानी कवायद है जब जब किसी विदेशी ने भारत पर अपनी संस्कृति और शासन को थोपने का प्रयास किया तब तब क्राँति हुई और अधिकाश सफल भी हुई पंरतु विदेशी चले तो गये किँतु भारत को खंड खंड और संस्कृति को विकृत कर गये ब्रिटिश इसका सबसे बड़ा उदाहरण है ये भारत पर कुछ ऐसे कानून थोप गये जिसने हिँदुतत्व ओर भारत को पंगु बना दिया और कांग्रेस ने तो हिँदु को एक दंगा फैलाने वाली जाति करार दे दिया और मुस्लिमो को पूर्ण धार्मिक आजादी ही नही धार्मिक काननू तक दे दिये और एक विष्शिट दर्जा अल्पसंख्यक देखर निँरकुश और दंबग बना दिया और मुस्लिम अपने गर्व से हम भारतिय है कहते है और अपने धर्म का प्रचार और प्रसार करते है और अंखड भारत के मुद्दे पर अपने को अलग रखते है ये कैसी राष्ट्रभक्ति है जो देश को धर्म से नीचे खड़ा करती है दरअसल मुस्लिम अपने को पहले धामिर्क फिर नागरिक मानते है और ये समझते है ये अपना देश नही है अगर ये सही नही है तो मुस्लिम संगठन कशमीर और आंतकवाद पर अपनी राय सपष्ट क्यो नही करते आतकवाद के नाम पर दारुल फतवा क्यो नही देता अगर मुस्लिम देश भक्त ही होता तो अपने को समान नागरिक संहिता का सर्मथन करता और अंखड भारत के निमार्ण मे आगे आता अगर इसके कारण को तलाशा जाये तो इन सबका मूल जिन्ना और गांधीजी की राजनैतिक कौशलता है अगर गांधी जी चहाते तो पाक्सितान की नीँव नही पड़ती और ना ही हिँदुतत्व आज राजनिति का बंदी होता जिन्ना जो भारतिय मुसलमानो मे मुस्लिम राष्ट्र का बीज बोकर चले गये ओर हमारे राजनेताओ ने खाद पानी दे कर एक वृक्ष बना दिया और हिँदु को साप्रदायिक खरपतवार साबित कर दिया क्या आप अब भी नही जागेगे अगर अंखड भारत का निर्माण करना है तो पहले अल्पसंख्यक नही एक देश भक्त बनना होगा जय अंखड भारत

गुरुवार, 1 सितंबर 2011

आज मैँ आपको लिये चलता हु आधुनिक साहित्य के उस युग मेँ जहाँ बेतरबीर का आलम है और कितने लेखको ने बुकर जैसे क ई नामी पुरूस्कार लेकर अंग्रेजो के लिचरेचरी दरवाजे पर भीखारी बन कर नाम कमा रहे है हमे शर्म भी नहि आती हमारे साहित्यिक पूर्वज प्रेँमचंद भारतेंदु और जयशंकर जी जैसे स्वाभिमानी लेखक थे जो समाज के लिये हि लिखते थे कोई बुकर के लिये नही ये कैसा न्याय है मातृभाषा के प्रति जहाँ हिँदी साहित्य का विकास नही हो पा रहा और आप अंग्रेजी मे कलम घिस कर धन और प्रसिद्धी के पीछे भाग रहे हो अरूधती राय विक्रम सेठ चेतन भगत ये अब हमारे नये साहित्यिक अवतार है इन लोगो का जीवन विलासता पूर्ण है ये क्या भारतीय समाज मे अच्छा साहित्य दे पायेगे अंग्रेजी अच्छी भाषा है लेकिन जन भाषा के प्रति उदासीनता ठीक नही क्यो की आप लोग युवा है आपके विचार युवाओ को अच्छे लगते है इसलिये आपको इन्हे अच्छा साहित्य देना होगा और आज भारत का अच्छा साहित्य हिँदी मे ही लिखा जा सकता है आज क ई युवा तो हिँदी साहित्यकार को भूल ही चुके है और तो और उनकि कालजयी रचनाऐ उन्हे बासी लगती है लेकिन उनको आपके नाम और रचनाऍ सहित पूरा वयक्तिव पता है आप जैसे भारतिय अंग्रेजी साहित्य कार साहित्य गोष्ठीयो मे कम फैशन शो ऑर फिल्मी दुनिया मे ज्यादा नजर आते है ऐसे आधुनिक अंग्रेजी बंदर क्या हिँदी की सेवा कर पायेगे आप लिखो खूब लिखो लेकिन हिँदी को अंग्रेजी के सम्मुख छोटा मत करो अगर आप हिँदी साहित्य को विश्व मे वो सम्मान दिला सको जो आज अंग्रेजी का है तो आपका लिखना धन्य है आगे आपकी मर्जी जय हिँद

बुधवार, 31 अगस्त 2011

मैँ जब भी अखबार पढता हूँ एक बात मुझे कचोटती है जब सेक्स विज्ञापन देखता हुँ की आज हम किस दिशा मे जा रहै है पूरे अखबार मे मसाज पार्लर एसर्काट सर्विस फोन सेक्स और न जाने क्या क्या बेहूदे विज्ञापन बड़ा अफसोस है तकनीकि का हम दुरपयोग कर रहे है हद तो तब है हमारा समाज चुप बेठा है और सरकार इस पर कोई प्रतिक्रिया नही करती और ना हि इनके चंगुल मे फसाँ कोई शर्म के
कहते है गौ माता मे 36 करोड़ देवता विराजते है यह सही है क्यो की गौ माता आस्था ही नहि समध्धी का भी प्रतिक है पर आज ये हमारी माता का अस्तितव अपने बूढे माँ बाप जैसा हो गया है घर मे रखना तो चहाते है पर सेवा नही गाँवो मे तो गौ माता का सम्मान बरकरार है लेकिन शहरी क्षेत्रो मे दयनीय स्थिती है यहाँ गौ माता व्यपार की मशीन हो ग ई है खूब दूध बेचो माल कमाओ इतना ठीक है लेकिन मरियल को कत्लखाने बेचो ये कौन सा सदाचार है गौ हत्या मे सने इन हाथो को कानून क्यो नही काटता लेकिन हम गाय पर क्या राजनीति करे ये अधिकार तो धर्म के ठेकेदारो का है आप रोज रोटी बनाते है लेकिन पहला ग्रास गाय को देना चाहिये इसके विपरित आप पहला निवाला अपने प्रिय विदेशी कुत्ते को बड़े प्यार से खिलाते है जब आप ऐसा करेगे तो आपके विचार भी कुत्ते जैसे ही होगे आप अपने को आधुनिक कहते हो लेकिन इस आधुनिकरण का क्या लाभ जब हम अपनी आस्था ही ना बचा पाये देश मे क ई गौमाता के भक्त छाति पीट रहे है क ई तो ईमानदार है और कुछ लालची कागजो मे गौशाला बनवा कर चारा खा रहे है और अपने को हिँदु कह कर हिँदु मर्याता को कंलकित कर रहे है अब तो हर भारतिय को ये सोचना होगा क्या हम सही कर रहे है