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बुधवार, 3 अगस्त 2011

हिना कौन है

हिना भारत आई और हम उनकी अदा पर मर मिटे वो एक विदेशमंत्री कम फैशनेबल ज्यादा नजर आई उनके वयक्तितव मै राजनितिक कूटनीती न के बराबर थी वो भारत शायद मनोरंजन के लिये आई थी क्यो की वह कोइ ऐसा समझोता या बात न रख सकी जिसके लिये उन्हे याद रखा जाये और तो और वे पाकिस्तान को गुनाहगार मानने से भी परहेज करती है जिसे अमरिका तक दोषी मानता है वो भारत इसलिये नही आई की वे भारत के हितो की बात करेगी वरन वे अपनी राजनीतीक जीवन को परिपक्व बनाने आई थी ओर हमने अपना समय और धन लुटा दिया यहाँ तक की हमने उनमे श्रीमती भुट्टो की छवि तलाशनी शुरू कर दी लेकिन भुट्टो एक राष्ट्रवादी नेता थी ओर कुशल नेत्री थी इसके विपरीत हिना मे राजनीति समझ का आभाव दिखता है हिना कौन है 

सोमवार, 25 जुलाई 2011

दूरदर्शन के वो काले सफेद दिन

अब बात करता हुँ उस जमाने कि जब हम छोटे थे उन दिनो की याद अब भी यू सँजो रखी है जैसे कोई अपना आतीत याद रखता है वो दिन याद है जब दूरदर्शन था था इसलिये कह रहा क्योकी आज केबल युग मेँ उसे पूछने वाला कौन है युवाओ ने तो उसे श्रद्धाजंली दे दी है उन्हे तो याद ही नही वे तो बिँदास टीवी एम टीवी के दिवाने है जिनके कार्यक्रमो मे एक बीप होती है जिसमे गाली छुपाई जाती है बेचारा दूरदर्शन इन धूर्तो के हथंकडे नही अपना सका तो मनोरंजन प्रेमीयो ने दुतकार दिया मुझे केबल पर गर्व है जिसने हमारे समाज और खबर जगत एंव जन जीवन मे एसा क्रूर बदलाव किया की हमलोग एक अकेले जीवन जीने वाले हो गये अब जीवन का रस उल्टा पुल्टा हो गया सास बहु सर्कस का खेल दिखाने लगी और घर की बुनियाद एसी कमजोर हुई की अब हम नुक्कङ पर आ गये अब हर परिवार मे महाभारत होती है अब हमे फुरसत नही की कुछ देर की अपने बाप के पैर छुये क्योकी ना हमने रामायण का वो युग नही देखा जिसमे जीवन थामने वाला घंटे भर का संन्नाटा था लेकिन फिर भी जीवन कितना रंगोली सा सुंन्दर था हमारी सास बहु बेटा बेटी एक साथ चित्रहार देखते जीवन मे रंग भर रहे थे उफ रोना आ गया उसे याद करते हुँये मै उस दूरदर्शन को तलाश रहा हुँ जिसे हमने बिग बोस और संयमवर जैसे अशलील अंधेरो मे खो दिया ओर सास बहु की सीरियलो कुटिल चाल मे आकर अपना पर परिवार को एकल कर लिया अब भी ये उम्मीद लगाये बैठा हु भले हम दूरदर्शन को भूल जाय पंरतु उसने जो हमे दिखाया उसे हम अपने जीवन मेँ ले आये धन्यवाद अगर ये लेख पंसद आये तो टिप्पणि अवश्य करे .

अथ श्री बालकृष्ण कथा

बाबा के सखा परम पूज्य ( अब धोखेबाज ऐसा सी बी आई और कांग्रेस मानती है) बालकृष्ण पूरी तरह राजनितीक भँवर मेँ फँस चुके है अब ये देखना है बालकृष्ण कौन सा पत्ता खोलते है इस प्रकरण से साफ दिखता है कि सी बी आई एक कठपुतली जाँच ऐंजेसी है क्यो की अगर स्वतनत्र होती तो कब की बाबा और बालकृष्ण को ये मुसीबत मोल ना मिलती ओर अगर बालकृष्ण दोषी है तो उनकी सजा निशचित है लेकिन यह प्रकरण हमारी बेतरबी प्रशासन पर उंगली उठाने को विवश करता है कैसे बालकष्ण को शस्र लाँयसेस ओर पासपोर्ट जारी हुऐ ओर अब तक जो भी आंतकी घटना ओर भ्रस्टाचार हुआ उसमे सरकारी मशीनरी भी सन्लिप्त है लेकिन हम बालकृष्ण को तूल दे रहे है उन अफसरो को ढृँडने की सीबीआई को फुरसत नही बाबा कि नागरिकता को लेकर जो भ्राँति क्रूर दिगविजय ने फैलाई वो बालकृष्ण के माता पिता ने दूर कर दी तो सीबीआई ने उनकी शिक्षा को लेकर भ्रमित कर रही है अभी तक सीबीआई हर जाँच मेँ 100 % खरी नही उतरी है सीबीआई एक राजनीति तेल से चलने वाली खटारा एबेसेडर है जिसका कोई भी उपयोग कर सकता है आरुषी केस तेलगी हवाला बोर्फस टेलीकाम आदी केस जो शायद आप भूल चुके है उन प्रकरणो मेँ की गई जाँच एक छलावा लगती है अब सीबीअइ एक राजनीती कुतिया की तरह सरकार के दरवाजे पर बैठी सिर्फ गुर्रा ती है

रविवार, 24 जुलाई 2011

किसान के आंदोलनी तवे पर राजनीती रोटिया

यूपी मे उधम मची है किसानो के आंदोलन को लेकर माया राज कि परेशानी बढ गई अगर ये मामला जल्द ना निबटा तो आने वाले यूपी चुनाव मे सत्ता सुंदरी किसी दुसरे के आंलिगन मे होगी कांग्रेस अपने युवराज को भेज चुकी है विगत कुछ दिनो से राहुल किसानो पर मेहरबान है जबकी दूसरा पहलू ये है किसान सदियो से मुसिबतो मे घिरा हुआ है जबकि राहुल एक नेता कम सेलिब्रिटी ज्यादा नजर आते है उन्हे सिर्फ लिखे भाषण पढना आता है किसान के मर्म को समझने के लिये उन्हे एक युवराज से साधारण बनना होगा सिर्फ कुछ पैदल चल कर या गरिब के घर रोटी खा कर आप वाह वाही तो लूट सकते है पँरतु किसानो के हितैषि नही आप एक स्वंतत्र विचार नही रख सकते आप जो कहेगे जो करेगे उसमे आपका निजी मत ना हो अगर उसमे होगा तो राजनीति का गंदला विचार किसान अगर आपके सहारे पार होने कि चाह नही रखता क्योकी कभी कोई भी दल किसानो का भला नही कर सकता अगर भला कर सकता है तो जमीन से जुड़ा आदमी अब दूसरा पहलू जब किसान आत्महत्या कर रहा होता है तब राहुल की स्वेदनाये नही नजर आती क्या विदर्भ ओर यूपी के किसान अलग है इस बात का जबाब राहूल को नही मालूम म प्र प्रदेश मे इंदरा सागर परियोजना मे अधिग्रहित जमीन का मुआव जा अभी भी क ई लोगो को नही मिला लेकिन राहुल ओर काँग्रेस ने उस ओर ध्यान नही दिया अब किसान इन दोगलो पर विशवास करेगा तो वह कभी जीत नही पायेगा इस लिये किसानो को अपनी लड़ाई खुद लड़नी चाहिये