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गुरुवार, 7 जून 2012

हिँदूतत्व पर चोट करत अंबेडकरवादी हथौड़ा

*सवैँधानिक चेतावनी * यह लेख मेरे
निजि विचार है अगर
आपकी भावना को ठेस
पहुँची हो तो आप मुझे ब्लाक कर सकते
है ........,..VANDEMATRM
अगर हम वेद की माने तो उसमे जाति जैसा घृणित शब्द है ही नही कर्म अनुसार वर्ण वयवस्था है मैँने कभी इतिहास मेँ नही पढा की किसी दलित ने क्षत्रिय या ब्राहमणो के विरूद्ध विद्रोह नही किया लेकिन जब मुस्लिम आंक्राताओ ने भारत मे अपना साम्राजय फैलाया तो उनहोने हिँदू धर्म से विमुख करने हेतु नीच कार्य शूद्रो से करने लगे और तब से ये शूद्र दलित हो गये अंग्रेजो के आगमन के बाद भी इन दलितो की स्थिति मे सुधार के लिये कोई रूचि नही दिखाई लेकि महात्मा फुले सावित्रि फूले शाहू
जी महाराज ईशवर चंद विद्यासागर
आदी समाज सुधारको ने दलितो के
उत्थान के लिये
ईमानदारी कर्मठता दिखाई और
कभी भी हिँदुतत्व का निरादर
नही किया और न ही वे धर्म परिवर्त
की और गये लेकिन अंबेडकर
जी जिनकी मानसिकता पर अंग्रेज
सवार हो चुके थे उसी अंबेडकर ने बौद्ध
पंथ की आड़ लेकर दलित को हिँदुतत्व
विरोधी बना दिया जबकी बौद्ध
धर्म हिँदुतत्व वृक्ष पर खिला पुष्प
ही है किँतु अंबेडकर के कुटिल दिमाग ने
दलित दशा सुधारने की बजाये उन्हे
नास्तिक बना दिया और दलित
कभी भी हिँदुतत्व की और न लौटे
सदा नास्तिक तिमिर मे भटकते रहे
यह सौच कर ही संविधान मे आरक्षण
का मीठा जहर घोल दिया...

रविवार, 27 मई 2012

अभिनव भारत के महान क्रांतिकार
हिँदुतत्व के उजियारे महात्मा वीर
दामोदर विनायक सावरक के अतुल्य
बलिदान को सेकुलर भले याद न रखे
लेकिन अंखड भारत हिँदू राष्ट्र
प्रेमि सदा प्रयत्नशील रहेगे .....वीर
सावरकर अमर रहे हिँदुतत्व विचारक
को उनकी जन्म तिथी पर मेरा शत शत
नमन —

शनिवार, 19 मई 2012

महात्मा गोड़से जंयती

महान हिँदुतत्व वादी भारत माता के सपूत राष्ट्रवादी महात्मा नाथूराम विनायक गोड़से के अवतरण दिवस पर ये शपथ ले की अंखड भारत के निमार्ण हेतु हम संकल्पित हो और जिस इतिहास ने गोड़से वादी विचार धारा का कभी विस्तार न होने दिया उस विचार धारा को नई पीढी मेँ इतना कूट कूट कर भर दे की उनमे हिँदुतत्व का ऐसा प्रचंड विस्फोट हो जो सेकुलरी इमारत को चकना चूर कर दे और अंखड भारत निमार्ण के लिये सामने आये ..अब सोने का वक्त नही है खुद जागो और अपने अंदर सोये हिँदुतत्व को जगाओ....वंदेमातरम

सोमवार, 14 मई 2012

जातिवाद की बदलो परिभाषा

भारत भूमि मे जातिवाद की भूमि सिर्फ बंजर है जिस पर केवल कुरितियो की खरपतवार उगा करती है जिसे पानी देने का काम जातिगत राजनिती करती है बसपा सपा गोगपा मुस्लिम लीग दलित पेँथर सर्वण समाज पार्टी ऐसे कई जाति आधारित राजनैतिक मंच है जो भारत मे अपनी जाति की उपेक्षा का ढोल बजाते हुये अपना उल्लू सीधा करते है और लोकतंत्र को जातितंत्र मे बदलकर रख दिया है तब क्या ऐसे मे भारत को विश्वगुरू बनना संभव है भारत मे अंखड भारत की नीँव रखी जा सकती है अगर भारत को अपने सर्वण युग की और पुन: अग्रसर करना है तो हमे पहले कट्टर भारतीय बनना होगा ब्राहमणवाद क्षत्रियवाद वैश्यवाद दलित वाद अंल्पसंखयकवाद की परिभाषा बदलनी होगी भारत मेँ ब्राहमण वाद नही होना चाहिये लेकिन एक श्रेष्ठ ब्राहमण ऐसा भी हो जो चाणक्य जैसी दूरदर्शता का पारखी है भारत मेँ क्षत्रिय वाद नही होना चाहिये लेकिन एक श्रेष्ठ क्षत्रिय राणा प्रताप ऐसा भी हो जो मातृभूमि का स्वाभिमान कभी लुटने न दे भारत मे वैश्य वाद नही होना चाहिये लेकिन एक श्रेष्ठ वैश्य जो मातृभूमि के लिये अपना सर्वत्र धन लुटा सके भारत मे दलित वाद नही होना चाहिये लेकिन एक श्रेष्ठ दलित होना चाहिये जो आरक्षण की बैसाखी पर न टिका हो भारत मे अल्पसंख्यक वाद नही होना चाहिये लेकिन एक श्रेष्ठ अल्पसंख्यक ऐसा भी हो जो वंदेमारम जय घोष को धर्म विरोधी न मानता हो....जरा सोचिये विचार किजीये....जय माँ भारती