Zee News Hindi: Latest News

बुधवार, 21 सितंबर 2011

गरीबदास का दर्द

पेट पीठ से लगा हुआ और मिट्टी मे सना हुआ है श्रम से कुंदन सा तपा हुआ है और लाचारी के आगे झुका हुआ है दरिद्र नरायण ना म रखा है यथार्थ है दरिद्रता और नारायण रूठा हुआ है काला चेहरा तन काला है बाँट रहा अमृत लेकिन मिलती उसको हाला है कर्तवयनिष्ठ हो कर विकास यही उसने ठाना है एहसान फरामोश पूँजीवादी उप कैसा जमाना है सरकारी आँकड़े सा जीवन और समर्पण सुविधाओ का केवल आंडबर निर्वस्त्र लुटा पिट शोषित कुपोषित फिर भी कैसे जीवित ये भला निरक्षर उन ज्ञानी से जो इन्हे बैकबड कहते है पर भूल जाते है इनके इशारो से ही विकास के पहिये चलते है इनका सच सच नही लगता सरकार का धोखा लगता है भारत मे गरीब जिँदगी मे नही फाइलो मे तरक्की करता है गरीबी मिटाओ ये नारा बेमानी है प्रजापालक की आँखो मे ना शर्म है ना पानी है

मंगलवार, 20 सितंबर 2011

भारत वर्ष की जन्मगाथा ऐतिहासिक कम पौराणिक ज्यादा है और सनातन संस्कृति जिसे हिँदुत्तव कहना उचित होगा क्योकी ये सभी संस्कृतियो मे श्रेष्ठ और तर्क रहित धर्म है यह बात सौ फीसदी सैँद्धातिक होने पर भी 1400 साल पुराना कट्टरता की कालिख मे पुता हिँसावादी धर्म उंगली उठाने की चेष्ठा करता है जिसके धर्म का मूल मँत्र अल्लाह निराकार है अरे ये मे मंत्र जपने वालो जरा इस मंत्र को टटोलो ये हमारे धर्म की ही है देन है रूद्रष्टक मे पहली पंक्ति कहै नमामीशमिशान निवार्णरूप विँभु व्यापकम ब्रह्म वेद संवरूप निराकार ओंकार मूंल तूरियम गिरा ग्यान गोतितमिँशम गिँरिशम इस श्रलोक का ही तुम पाँच बार जाप करते है लेकिन फिर भी कहते हो हिँदू काफिर कौम है ये नमक हरामी का उदाहरण नही है भले ही आज इस्लाम फल फूल रहा हो लेकिन ये सच है इसकी जड़े हिँदुत्त से ही जुड़ी है पंरतु तुम अंधे धर्म और अंधे सिँध्दात के पीछे ही चले जा रहे हो जो तुम्हे अंधकारमय हिँसक जीवन की और लेजा रहा है तुम जितने भी धार्मिक कर्मकांड करते हो वे प्राकृति के विपरित ही होते है तो फिर तुम इस्लाम को सच्चा और पवित्र धर्म कैसे कह सकते हो क्योकी तुम हिँसक और क्रूर कर्म करते हो बहुविवाह करते हो ये विपरित कर्म क्या तुम्हे जन्नत मे जगह दे पायेगे आँतकवाद और देशद्रोही हरकतो से तुम वैसे ही सनातन धर्म और भारत से विश्वास खो चुके हो और अब ये तुमको तय करना है सनातन के सिँधान्त पर चल कर इस्लाम का पालन करना है या आँतक फैला कर इस्लाम को बदनाम तुम चाहे जो करो पंरतु ये याद रखो सनातन धर्म तुमहे माफ कर ही देगा गजनी को माफ कर सकते है तुम तो फिर भी सौतेले भाई हो जय राष्ट्रवाद

सोमवार, 19 सितंबर 2011

आज मै दुखी हो गया एक टोपी कि वजह से जो टोपी लाज कहलाती थी वो शर्म का कारण बन गई और टोपी एक वर्ग विशेष कि इज्जत बन गई और विशेष वर्ग गुर्रा कर देखने लगा ओर बुरा ये हुआ किसी गांधी बाबा की विरासत पर पलने वाले कांग्रेसी साँप भी उस टोपी के लिये फुँफकार मार रहे है जो उन्होने कभी नही पहनी क्यो की पहले से खद्दर की टोपी पहनते आ रहे मोदी जी ने कोई गुनाह नही किया क्योकी वो खद्दर की नही अनुशासन की काली टोपी पहनते है और उस पर दाग लगना मुशकिल है शायद इसलिये कांग्रेस और ज्यादा दुखी हो गई नरेन्द्र मोदी का टोपी कांड तो एक बहाना है असली काम कांग्रेस को गुजरात मे आसन जमाना है और हमारे मुस्लिम भाई तो भोँदू है कट्टरता की पट्टी जो बाँध रखी है ये तो इस्लाम को देश से उपर मानता है अपनी नमकहरामी के चलते वंदेमातर को गाने मे शर्म महसूस करता है अब जब मोदी ने टोपी नही स्वीकारी तो बुरा मान गया अरे मुस्लिम बंधू शाल तो मोदी ने लेली तुम्हारा मान तो रखा अरे तुम खुद सोचो अगर हम मुस्लिम विरोधी होते तो आज तुम इतने आजाद ना होते पाकस्तान से ज्यादा खुश रखते है आपको आप फिर भी हमे सांप्रदायिक की सुई चुभोते हो और कांग्रेस के तलवे चाटते हो अरे ये कांग्रेस अपने सगे बाप की नही तो तुम्हारा और देश का क्या भला करेगी मोदी की टोपी पर तो खूब चिल्ला रहे हो जरा कांग्रेस पर भी भड़ास निकालो जो टोपी पहना कर अपना उल्लू सीधा कर रही है जागो भारत के मुस्लमानो वरना एक दिन तुमसे ये भारत माता कहेगी किस हक से यहाँ रह रहे हो

रविवार, 18 सितंबर 2011

भिखारी

भूत तो हम भूल चुके है भविष्य की हम सोचे क्यो जीना है अभी पूरी जिँदगी फिर दुखो से निराश क्यो चाहे हालात हमे बेबस कर दे या मातम को घर मे धर दे लाचारी से भले पड़े पाला चाहे किस्मत पर लगा हो ताला हम तो रहते फिर भी मस्त मौला ना हमारा ठौर ठिकाना सारे जग को अपना घर जाना निर्भीक निडर रहते हरदम कभी दावत कभी फाँके पड़ना नही शिकायत उस दाता से डर लगता है धन दौलत कि बातो से क्षण भंगुर सा जीवन अपना काम हमारा मानवता की माला जपना हाथ कटोरा लेकर घूमे फक्कड़ता के मद मे झूमे जग कहे पागल और भिखारी दूर रखे सब रिश्तेदारी कहने को हम है एक भिक्षुक खुले रखे हे अपने चक्षु खाली आये खाली जायेगे केवल दाता के गुण गायेगे हमे देख कर तुम जीना सीखो अपने सदगुण जीवन मे लिखो