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बुधवार, 9 नवंबर 2011

आस्था और मौत भूल किसकी

शांतिकुँज हरिद्वार के गायत्री परिवार के आयोजन मे मृत आत्माओ को श्रद्धाजंली
आस्था एक ऐसी भावना है जो हर दिमागदार प्राणी मे होती है ओर आस्था निष्ठावान और अंधी भी हो जाती है और अगर आस्था निष्ठावान है तो ईशवर को ज्यादा देर नही लगेगी इशवर खुद आपकी आस्था के प्रति नतमस्तक हो जायेगे किँतु अगर आप अंधी आस्था का बोझ लेकर भक्ति मार्ग पर जायेगे तो यम भी तैयार है इसका उदाहरण हम धार्मिक स्थलो मे हुई भगदड़ मे काल के ग्रास बने लोगो को देख कर तो यही स्द्धि होता है अब आप बताये क्या ईशवर को विषेश पर्व या तिथी ता दिन मे ही याद किया जाये जो आस्था आपको 365 दिन इशवर मे होनी चाहिये वो आप एक ही दिन उड़ेल देते है जबकी ये आस्था नही होड़ बाजी है पहले नमबर पर आने की कौन पहले दर्शन करेगा कौन पहले प्रसाद लेगा यही भावनाऐ भगदड़ अफवाहे और अवयवस्था को जन्म देती है आयोजक भी जानते है ऐसी स्थिती बनेगी फिर भी कोई ठोस कदम नही उठाते और अंधी आस्था के आगे प्रशासन भी असहाय पड़ जाता है चाहे शबरीमाला मंदिर मे मौतो का खेल हुआ हो या कृपालू महाराज के आयोजन मे अंधी आस्था ओर अफवाहो ने सैकड़ो लोगो को लील लिया कपड़े बर्तन भोजन बाँटने जैसे सामाजिक कार्य भी इस भगदड़ को निमंत्रण देते है लेकिन इस भगदड़ की नैतिक जिम्मेदारी ना तो आयोजक लेते है और ना ही प्रशासन और जाँच ऐँजेसी बिठा दि जाती है लेकिन इसके वावजूद ऐसी दुखद घटनाये हो ही जाति है और आरोप किस पर लगाये प्रशन अधूरा रह जाये हिँदु संगठनो को इसके लिये आगे आना चाहिये और वयवस्था संवसेवको के हाथो मे देना चाहिये संघ और बँजरग दल जैसे संगठनो को ऐसे आयोजनो मेँ भागीदारी करना चाहिये ताकी आगे से ये घटनाये ना हो और भक्तो को भी होड़बाज छोड़ कर नियमनुसार आयोजन मे रहना चाहिये आईये एक अंखड भारत का निमार्ण करे और अपने मन मे सोये हिँदुतत्व और सनातन आत्मा को जगाये .

रविवार, 6 नवंबर 2011

मालेगाँव के नौ आरोपियो की जमानत - मुस्लिम तुष्टिकरण

जब मालेगाँव विस्फोट मे
गिरफ्तारियाँ हुई तो सेकुलर
मीडिया और सेकुलरी कुत्ते भोँक भोँक
कर हिँदुतत्व को आंतकवाद चिल्ला रहे
थे जब आज सबूतो के आभाव मे
9 गद्दारो को जमानत मिल गई
ये इस और इशारा करती है कांग्रेस अभी भी मुस्लिम तुष्टिकरण को हवा देकर हिँदुतत्व को हानी पहुँचा रही है और नंपुसक मीडिया भी इन सेकुलर वादियो का साथ दे रही है और जानबूझकर प्रज्ञा और अन्य संघ कार्यकर्ताओ को दोषी बनाने मे तुली हुई है यहाँ तक की न्यंयावयवस्था पर भी सेकुलरवादि हावी होते दिख रहे है 4
साल तक मूर्ख बनाती एटीएस और सीबीआई ने ना तो कोई प्रज्ञा व अन्य के खिलाफ कोई ठोस गवाह या कोई सबूत सामने रखे है और ना ही प्रज्ञा और अन्य की सहायता के लिये कोई आगे आया यहाँ तक की अभी तक प्रज्ञा और अन्य को कोई सुविधाये भी नही दी जा रही ऐसा हाल रहा तो हिँदूआंतकवाद तो जन्म नही लेगा किँतु हिँदू क्राँति अवश्य हो जायेगी...देश के गद्दारो
धिक्कार है..जय अंखड भारत
अंधी जनता को धिक्कार सेकुलरीवाद
ियो को

शनिवार, 5 नवंबर 2011

सेकुलरवादियो का नया दाँव - हिँदू आंतकवाद

मुझे भारत पर गर्व है और हर भारतीय पर भी लेकिन उतनी ही नफरत करता हूँ जो नक्सलवाद बोडो उल्फा और उन लोगो से जो हिँदुतत्व को भी इन घिनौने कीचड़ मे घसीटने का प्रयास कर रहे है जिन्हे हिँदू और हिँदुतत्व की परिभाषा ही नही मालूम जो सेकुलर का दिया लेकर हिँदूतत्तव का प्रकाश दबाने की चेष्ठा कर रहे है मालेगाँव और अजमेर विस्फोट मे साध्वी प्रज्ञा एंव अन्य जिन पर आरोप मढा गया उसका तथ्य शून्य है सीबीआई अंधेरे मे तीर चला रही है ना तो सीबीआई के पास कोई ठोस गवाह है और ना कोई एसा साक्ष्य जो प्रज्ञा पर आरोप सिद्ध कर सके और ना ही सीबीआई ने प्रेसवार्त कर कभी इस केस पर प्रकाश डाला मीडिया ने भी अपना चापलूस धर्म निभाते हुये वही तथ्य जनमानस के सामने रखे जैसा सरकार ने चाहा अगर प्रज्ञा के खिलाफ ठोस सबूत है तो सजा मिलनी चाहिये किँतू प्रज्ञा एंव अन्य आरोपियो पर सौतेला व्यवहार ये सिद्ध करता है आँतकवाद को आप ही विस्तार कर रहे है जिस तरह कसाब अफजल जैसे राक्षसो को सुविधाये ओर रक्षा उपलब्ध करवा रही है जबकि कसाब और अफजल के विरूद्ध सबूतो का पूरा पुलिदां है फिर भी अभी तक चैन से जेल मे रोटियाँ तोड़ रहा है प्रज्ञा और अन्य जेलो मे बंद नरकीय जीवन जी रहे है लेकिन समाज चुप बैठा है मीडिया चुप बैठा है लोकतंत्र का गुणगान करने वाला चुप बैठा है ऐ कैसा लोकतंत्र है जो आंतकवाद का जिवित रखता है ये कैसा नंपुसक मीडिया है जो भेदभाव करता है अगर हिँदुतत्व आंतकवादी होता तो कब का भारत अंखड हिँदू राष्ट्र 1947 मे ही बन गया होता हिँदूत्तव आंतकवाद के साथ जोड़ कर सेकुलरवादी हिँदुओ मे फूट डालने का काम कर रहै ताकी फिर से बाबर या तैमूर जैसा भारत को लूट सके सार ये हे सेकुलरवादियो के इस दांव को हमको समझना चाहिये और हिँदू एकता शक्ति को सशक्त बनाना चाहिये.....जय अंखड भारत

शुक्रवार, 4 नवंबर 2011

अंखड भारत की बात करने वाले हर हिँदू को प्रणाम और गर्व से अपने को हिँदू कहने वाले चुँनिदा भेदियो से एक चुभता सवाल किस गर्व से अपने को हिँदू कहते हो जब्कि तुम्हार पवित्र हिँदुतत्व मे सेकुलरी और पंथवादी आत्माओ का वास हो चुका है तुम सिर्फ नाम मात्र के हिँदू हो तुमने अपनी सनातन धर्म और पंरपरा को बेच डाला है और अपना एक नया अस्तित्व गढ लिया है तुम आर्य समाजी बन बैठे और वेदो पर एकाधिकार कर बैठे और आस्था को पैरो तले कुचल दिया और हिँदुत्तव कौ बाँट दिया फिर हमे हमे तुम से कोई बैर नही अरे ब्रह्मसमाजियो तुम भी आर्य समाजियो के भाई ही हो फिर भी तुमसे बैर नही लेकिन पीड़ा दायक बात ये है तुमने महापुरूषो को भी जातिकत बंधनो मे बाँध कर हिँदुतत्व की जड़े खोदने का काम कर दिखाया और हिँदु पिछड़े पन का शिकार हो गया कोई कबीरपंथी बन बैठा कोई शैव कोई वैष्णव कोई जैन कोई राधास्वामी कोई रविदासी कोई डेरा सच्चा सौदा कोई पीर फकिर का अनुयायी बन गया और हिँदुतत्व को घायल करता अपने अपने पंथ की चाकरी करने लगा जिसका फायदा सेकुलरी कौम उठा कर तुमको हिँदुतत्व और भारतिय संस्कृति से दूर ले जा रही और गर्व से अपने को हिँदू कहते है हिँदुतत्व को दृढता के लिये किसी पंथ की जरूरत नही जरूरत है बल्की राम कृष्ण परशूराम कबीर नानक दयानंद विवेकानंद जैसे धर्मप्रकाशक चाहिये तब हि हिँदुतत्व संगठित और संदृढ हो कर अंखड भारत का निमार्ण करेगा ....जय अंखड भारत