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मंगलवार, 16 अगस्त 2011

देश विचार

जय भारत जय सनातन तुझको मेरा प्रणाम एक हो लक्ष्य एक हो हमारा ध्यान ना कुरूतियो का दल दल हो ना हो हम धर्मभीरु ना कोई मिथक आंडम्बर हो संस्कार और संयम के भूषण जातिप्रथा का हो दूर कुपोषण एक मानवता चिर परिचित हो तृष्णा मिटे हर मातृ भूमि की हरिता ओर सिँचित हो लज्जा हो नारी मे इतनी शोशित समाज ना कर पाये वीर प्रसूता बन आज तू महापुरूष को तु फिर जाये अपने अपने पथ चुन लेना जीवन का समय अब शेष नही सियार शासन आ गया सत्य का परिवेश नही विनती है कर्णधार देश के तुम ना मुह फेर लेना देशद्रोहियो के प्राण लेना देश की आन मे प्राण देना

मंगलवार, 9 अगस्त 2011

कांन्वेट शिक्षा मतलब अंग्रोजो कि दलाली

bkआज एक खबर पढी स्कूली छात्राये शराब पीती पकडी ग ई ये एक खबर मात्र नही थी ये उस ओर इशारा है जहाँ हमारे बच्चो का भविष्य तिमिर युक्त और चरित्र विशाक्त बनाया जा रहा है और हम सिर उठा कर दर्प मे कहते है मेरा बच्चा मँहगे कांन्वेट स्कूल मै पढता है देश आजाद तो हो गया लेकिन हमे मानसिक गुलामी से मुक्ति कब मिलेगी क्या हमारी सरकारी शिक्षा इतनि निम्न है की हम इन इसाईत के कारखानो मे अपनी फसल तैयार कर रहे है बेशक कांन्वेट स्कूल शिक्षा को गंभीरता से लेते हो लेकिन वे हमारे बच्चो से वे संस्कार छीन लेते है जो उसे अपने परिवार और परिवेश से मिलते है ये कैसी हमारी लाचारी है आखिर इनके प्रति आकर्षण क्यो है क्या आप ये उम्मीद करते है आपका सुपुत्र आपको लात मार कर घर से निकाल दे या फिर आपके सामने कोई व्याभिचार करे लेकिन ये आपके साथ 100% हो सकता है क्योकी आप सिर्फ कांन्वेट मे पढा ही नही रहे बल्कि प श्चिमि संस्कृति की ओर धकेल रहे है कांन्वेट मे पढ कर बेशक अच्छा रोजगार मिले या ना मिले लेकिन फर्लट सेक्स नशा आगे रहने की चाह घंमड धोखा देने मे महारत हासिल हो जायेगी और हो सकता है तुम लालच मे आकर अपनी आत्मा बेच आओ इसाई बन जाओ तो फिर क्या मतलब एसी शिक्षा का जो चरित्र पर ही कालिख पोत दे क्या आखिर हम चुपचाप तमाशा क्यो देख रहे है इन मिशनरी स्कूलो का बहिष्कार क्यो नही करते अगर हम कांन्वेट स्कूलो का विरोध नही करेगे तो हम एक बार फिर दासता स्वीकारनी होगी और ये दासता अंग्रेजी राज से भयानक और आंतकी होगी तो आप अपने बच्चो को क्या बनायेगे देश का लाल या फिँरगीयो के दलाल इति श्री

सोमवार, 8 अगस्त 2011

मरता लोकतंत्र

bkआज देश के हालात देख कर लगता है हमे लोकतंत्र का गला घोँट देना चाहीये आखिर हमने लोकतंत्र को शून्य चेतन क्यो कर दिया उसे मर जाना चाहिये ताकी भ्रष्ट कांग्रेस के हाथो दोबारा ना लगे देश मे भ्रष्टाचार की सुनामी आ ग ई ओर सरकार नीँद मे बड़बड़ा रही है कोई इस अंधेर राज का विरोध करता नजर आता है तो उसे चोर बना दिया जाता है आज दिग्गज मंत्री तिहाड़ मे ऐश कर रहे है और सरकार इन्हे बचाने की जुगत मे लगी है अगर हम 60 वर्षो का काग्रेसी राज का इतिहास देखे तो निष्कर्ष निकलता है शास्त्री जी के अलावा कोई भी एसा नही जिस पर दाग ना लगा हो और शायद कीसी और दल ने इतना भ्रष्टाचार किया हो भा ज पा तो भ्रष्टाचार की अभी परिभाषा भी नही जानती हमारा अन्धा लोकतंत्र केवल सुनता है और देश को पहले गर्त मे ढकेलता है फिर आंदोलन रूपी डंडा पकड़ कर निकल पड़ता है क्या हम ऐसे लोकतंत्र पर विश्वास कर लेते हैअगर हमने 10 वर्ष भी (NDA और अन्य मिली जुली सरकारो को छोड़ कर) गैर काग्रेसी दल को दिये होते तो देश के हालात कुछ ओर होते आज हर एक के मन मे प्रशन है आज मंहगाइ आँतकवाद नक्सलवाद भ्रष्टाचार काला धन और ना जाने कितनी सम्सयाओ से हम जूझ रहे है 60 कुर्सी वापरने के बाद भी ये समस्या जस की तस है ये हमारे लोकतंत्र का मजाक है जो हम देश को एक अच्छी सरकार भी नही दे सकता ऐसे लोकतंत्र को दफना दिया जाय और न ई क्राँति का बिगुल फुँका जाये जय हिंद

रविवार, 7 अगस्त 2011

पश्चिमी संस्कृति का आदी युवा

आज जब आज चारो और देश मेँ ज्वलनशील मुद्दे है वही दूसरी ओर हमारे युवा ओ को पश्चिमी संस्कृति की हवा लग गई है मेरा मन उस अधिकार को गाली देने को करता है जो 18 के बाद युवाओ को खुल्ला सांड घोषित कर देता है आज ये युवा अपने को आधुनिक कह कर अपनी संस्कृति का चीर और अपने चरित्र का हरण पश्चिमी संस्कृति को करने दे रहे है क्या नारी क्या नर सभी अपने को हाई क्लास की आड़ मे अपने को कितना नीचे गीरा चुके है पब डेटिग फर्लट सिगरेट शराब और ना जाने क्या क्या आज नारी इतनी फैशनेबल हो ग ई है रेव पार्टी मे धुआ उडाति ये अपनी शान समझती है त्यागमूर्ति नारी पश्चिमि सभ्यता कि रखैल बन कर रह ग ई है और वे युवा जो प्रेमदिवस जैसे दिवसो पर अपना धन विदेशीयो को लुटाते है या मेकडोनल मे पिज्जा खाते है वे किसी बलातकारी से कम नही जो पश्चिमी संस्कृति के सामने हमे नंगा कर रहे है जो नारी पशिचम की राह मे चल कर सिगरेट पिये बियर कि चुस्किया ले वो भूल क्यो गई कि राम कृष्ण भगत आजाद को उसने हि जना है आज प्रेम तक की परिभाषा को इन युवाओ ने बदल डाला है प्रेम अब लिव इन रिले.बन गया है ऐसे युवाओ से देश का क्या भला होगा जो खुद गुलामी मानसिकता लिये जी रहे है विश्वगुरू भारत जिसने शून्य से कामकला तक का ज्ञान विश्व को दिया ओर अब बही पश्चिम हमारे हि ज्ञान को विकृत कर हमारे युवाओ को बाँट रहा है आधुनिकता की अंधी दुनिया मे हमारा युवा अपने संस्कार विचार सब खोता जा रहा है कहने को हमारे देश मेँ 80% लेकिन राष्ट्रवादी युवा गिनति के मिलेगे अगर आज युवा नही जागा तो आने वाली पीढी को एक बार फिर1857 दोहराना होगा इतिश्री