गाँधी जी को दोष देना गलत है गाँधी ने हर भारतीय को सवाम्ब्लन बनना सिखा अगर आज हम गाँधी के विचारो के पीछे होते तो देश की ये दशा नहीं होती कांग्रेश जिस तरह गाँधी जी को अपना नेता मानती है ये उसकी सची भावना नहीं वरन उसकी कूट निति है क्यों की जब गाँधी जी ने कांग्रेश को ख़त्म करने की बात राखी थी जब कांग्रेस ने उनका समर्थन नहीं किया अगर गाँधी कहते तो सत्ता सुख भोग सकते थे क्युकी उस समय गाँधी जी का सम्मोहन सरे देश में था जिसे धूर्त कांग्रेस ने अपने हित में भुनाया ये बात किसी से छिपी नहीं है आज़ादी के बाद तुरंत गाँधी जी की हत्या भी कोंग्रेस के लिए विश्वास पात्र पार्टी बनकर उभरी गाँधी के उस वाक्य में उनकी राष्ट्रवादी विचार धरा धिक्ति है वो कहते थे भारत गावो में बसता है गाँधी जी हिन्दुत्त्व वादी विचारो के समर्थक थे यह बात कांग्रेश भी जानती थी लिकिन वे गाँधी जी के सामने विरोध नहीं करते क्यों की कांग्रेस देश की सत्ता पर काबिज़ होना चाहती थी लेकिन गाँधी जी को कांग्रेस में पूरी आस्था थी इस कारन गाँधी जी को लेकर कांग्रेस में भी एक राय नहीं बन सकी इस वजह से सुभाष बोस लोकमान्य तिलक ने गरम दल बना लिया
बुधवार, 22 जून 2011
शनिवार, 18 जून 2011
हम भारतीयों को शर्म आनी चाहिए हम बाबा राम देव और अन्ना के आन्दोलन के साथ जुड़े लेकिन न हम सरकार को झुका सके न अपने आन्दोलन को सफल बना सके क्या जनशक्ति इतनी निर्बल हो गई है की हम अपने हक के लिए सरकार से भीख मांगनी पढ़ रही है हम एकजुट होने का क्यों ढोंग करते है जबकि हम जल्दी बिखर भी जाते है हाल ही में हमे ये परिणाम भी देखने को मिला वह यहाँ संकेत दे रहे है अब हमें फ्हिर से सवतंत्रता का बिगुल फुकना च्चाहिए रामलीला मैदान पर जो बर्बरता पूर्ण घटना घटी उसकी अगर विवेचना की जाये तो उसके लिए हम ही दोषी है हम दो धुरियो में बट चुके थे कुछ अन्ना के साथ थे तो कुछ बाबा रामदेव के साथ जबकि दोनों का लक्ष्य और आन्दोलन का तरीका भी एक ही था अगर अन्ना और बाबा एक मंच पर होते तो यह घटना नहीं घटती इस बिखराव का सरकार ने खूब फायदा उठाया और उसने आन्दोलन को दबा दिया सरकार की कूटनीति की में प्रशसा करता हु जो उसने बाबा पर ही बेमानी का आरोप लगा दिया कांग्रेस का दमन देशद्रोही यों ने थाम रखा है ये बात हम को जान लेना चाहिए किन्तु हम कोंग्रेस को एक इमानदार दल मानते आ रहे है उसके समोहन में इस कदर जकड़े है की आज फिर एक जे पि जैसे नायक की क्रांति चाहिये अब भारतीय राजनीती का नव उदय होना चाहिये और कांग्रेस को उखड फेकना और बाबा और अन्ना जैसे विचारो वाले नेताओ को सत्ता पर बैठना चाहिये तभी भारत का नवुदय हो पायेगा
शनिवार, 9 अप्रैल 2011
एक गाँधी हार गया
आज हम एक आन्दोलन में फिर जीत गए, लेकिन एक क्रांति की चिंगारी जो अन्ना
ने भारतीयों के दिलो में जगाई अब ठंडी हो गई, शायद हम सब कुछ दिन बाद भूल जायेगे अन्ना कौन थे? क्रांति तो सब कहते है लेकिन उसका मूल्य कौन चुकाए इस पर हम भारतीयों की बोलती बंद हो जाती है अन्ना को क्या पड़ी थी की वो अनशन करे अन्ना का अनशन क्या हुआ हम भी भेड-चाल की तरह पीछे हो लिए क्या हम अपनी सोच नहीं बदल सकते क्यूँ एक नए गाँधी और भगतसिंह को खोजते है क्या हम सन सतावन को भूल गए है जो एक इतिहस बन कर रह गया |
बुधवार, 23 मार्च 2011
23 मार्च के शहीदो को नमन
आज शहीद दिवस है इसे याद रखना हमारे युवाओ के लिये शर्म की बात है क्यो की वो इतिहास को एक किताबी ज्ञान मान बैठे है और जिसको याद है वह एक पिछड़ा और देहाती है आज सोशल नेटवर्क साइट पर युवा मनचले सांड बन कर नारी को आर्कषित करने मे लगा हूआ है एसे युवा प्रेम दिवस और अंग्रेजी साल को ऐसा मनाता है जैसे उनके बाप दादा इगलिस्तान से आये हो केवल कुछ युवा जिनमे खालिस भारतीय रक्त प्रवाहित है वे ही जानते है की भगत सिँह और आजाद एक सिरफिरे आशिक थे जो देश से प्रेम करता था और एक सच्चे आशिक की तरह देश पर मर गये और हमे आज उनकि याद मेँ एक आँसू का कतरा बहाने मे शर्म क्यो होती है तुम लोगो को आजादी भीख मे मिली है भला हो भारत के उन क्राँति वीरो का जो आजादी बिना कोई मोल लिये तुम्हे अर्पण कर दी वरना किसी अँग्रेज का मल मूत्र फेकते उन शहीदो को बड़ी पीड़ा होती होगी जो इस देश का भद्दा रूप देखते होगे और सोचते होँगे हमने अपनी जवान क्यो तुम पर लुटा दी बेचारे गाँधी बाबा जिनके आदर्श हमे जीवन मे उतारना चाहिये था हमने उनको नोटे पर उतार दिया और गाँधी का सत्य अँहिसा भ्रस्टाचार और गरीबी की भेट चढ गया और हम कुछ कर नही पा रहे है वैसे कहने को हम लोकत्रँत मे जी रहे है लेकिन हमारी आत्मा को आधुनिकता और वासना ने जकड़ रखा है जब हमारी आत्मा ही गुलाम है तो हम गुलामी की बेड़ियो को काटने वालो को कैसे याद कर सकते है दो लाइन और लिखता हुँ मिट नही सकती शहादत चाहे लाख कोई मिटाये एक जीवन मेरा मिट गया देश पर गम नही आखिर हम मिट्टी के कुछ काम आये .
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