दिल्ली मेँ चलती बस मे गैँगरेप और यातना की जितनी निँदा की जाये कम है जिनहोने ये कृत्य किया है वे मानवता के चोले का त्याग कर चुके है आत्मा पिशाच बन चुकी है उन छ लोगो की चरित्र की इस गिरावट पर चिँता होनी चाहिये हमारे समाज को जो खुद को पुरुष प्रधान कह कर पीठ ठोँकता है
गुरुवार, 27 दिसंबर 2012
दामिनी के बहाने आओ संस्कृति की और लौट आये
दिल्ली मेँ चलती बस मे गैँगरेप और यातना की जितनी निँदा की जाये कम है जिनहोने ये कृत्य किया है वे मानवता के चोले का त्याग कर चुके है आत्मा पिशाच बन चुकी है उन छ लोगो की चरित्र की इस गिरावट पर चिँता होनी चाहिये हमारे समाज को जो खुद को पुरुष प्रधान कह कर पीठ ठोँकता है
गुरुवार, 7 जून 2012
हिँदूतत्व पर चोट करत अंबेडकरवादी हथौड़ा
*सवैँधानिक चेतावनी * यह लेख मेरे
निजि विचार है अगर
आपकी भावना को ठेस
पहुँची हो तो आप मुझे ब्लाक कर सकते
है ........,..VANDEMATRM
अगर हम वेद की माने तो उसमे जाति जैसा घृणित शब्द है ही नही कर्म अनुसार वर्ण वयवस्था है मैँने कभी इतिहास मेँ नही पढा की किसी दलित ने क्षत्रिय या ब्राहमणो के विरूद्ध विद्रोह नही किया लेकिन जब मुस्लिम आंक्राताओ ने भारत मे अपना साम्राजय फैलाया तो उनहोने हिँदू धर्म से विमुख करने हेतु नीच कार्य शूद्रो से करने लगे और तब से ये शूद्र दलित हो गये अंग्रेजो के आगमन के बाद भी इन दलितो की स्थिति मे सुधार के लिये कोई रूचि नही दिखाई लेकि महात्मा फुले सावित्रि फूले शाहू
जी महाराज ईशवर चंद विद्यासागर
आदी समाज सुधारको ने दलितो के
उत्थान के लिये
ईमानदारी कर्मठता दिखाई और
कभी भी हिँदुतत्व का निरादर
नही किया और न ही वे धर्म परिवर्त
की और गये लेकिन अंबेडकर
जी जिनकी मानसिकता पर अंग्रेज
सवार हो चुके थे उसी अंबेडकर ने बौद्ध
पंथ की आड़ लेकर दलित को हिँदुतत्व
विरोधी बना दिया जबकी बौद्ध
धर्म हिँदुतत्व वृक्ष पर खिला पुष्प
ही है किँतु अंबेडकर के कुटिल दिमाग ने
दलित दशा सुधारने की बजाये उन्हे
नास्तिक बना दिया और दलित
कभी भी हिँदुतत्व की और न लौटे
सदा नास्तिक तिमिर मे भटकते रहे
यह सौच कर ही संविधान मे आरक्षण
का मीठा जहर घोल दिया...
निजि विचार है अगर
आपकी भावना को ठेस
पहुँची हो तो आप मुझे ब्लाक कर सकते
है ........,..VANDEMATRM
अगर हम वेद की माने तो उसमे जाति जैसा घृणित शब्द है ही नही कर्म अनुसार वर्ण वयवस्था है मैँने कभी इतिहास मेँ नही पढा की किसी दलित ने क्षत्रिय या ब्राहमणो के विरूद्ध विद्रोह नही किया लेकिन जब मुस्लिम आंक्राताओ ने भारत मे अपना साम्राजय फैलाया तो उनहोने हिँदू धर्म से विमुख करने हेतु नीच कार्य शूद्रो से करने लगे और तब से ये शूद्र दलित हो गये अंग्रेजो के आगमन के बाद भी इन दलितो की स्थिति मे सुधार के लिये कोई रूचि नही दिखाई लेकि महात्मा फुले सावित्रि फूले शाहू
जी महाराज ईशवर चंद विद्यासागर
आदी समाज सुधारको ने दलितो के
उत्थान के लिये
ईमानदारी कर्मठता दिखाई और
कभी भी हिँदुतत्व का निरादर
नही किया और न ही वे धर्म परिवर्त
की और गये लेकिन अंबेडकर
जी जिनकी मानसिकता पर अंग्रेज
सवार हो चुके थे उसी अंबेडकर ने बौद्ध
पंथ की आड़ लेकर दलित को हिँदुतत्व
विरोधी बना दिया जबकी बौद्ध
धर्म हिँदुतत्व वृक्ष पर खिला पुष्प
ही है किँतु अंबेडकर के कुटिल दिमाग ने
दलित दशा सुधारने की बजाये उन्हे
नास्तिक बना दिया और दलित
कभी भी हिँदुतत्व की और न लौटे
सदा नास्तिक तिमिर मे भटकते रहे
यह सौच कर ही संविधान मे आरक्षण
का मीठा जहर घोल दिया...
रविवार, 27 मई 2012
शनिवार, 19 मई 2012
महात्मा गोड़से जंयती
महान हिँदुतत्व वादी भारत माता के सपूत राष्ट्रवादी महात्मा नाथूराम विनायक गोड़से के अवतरण दिवस पर ये शपथ ले की अंखड भारत के निमार्ण हेतु हम संकल्पित हो और जिस इतिहास ने गोड़से वादी विचार धारा का कभी विस्तार न होने दिया उस विचार धारा को नई पीढी मेँ इतना कूट कूट कर भर दे की उनमे हिँदुतत्व का ऐसा प्रचंड विस्फोट हो जो सेकुलरी इमारत को चकना चूर कर दे और अंखड भारत निमार्ण के लिये सामने आये ..अब सोने का वक्त नही है खुद जागो और अपने अंदर सोये हिँदुतत्व को जगाओ....वंदेमातरम
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