Zee News Hindi: Latest News

गुरुवार, 20 अक्टूबर 2011

हिँदुत्तव विकृति दूर करो

विकृति कैसी भी हो बुरी ही लगती है चाहै वयक्ति सर्वगुण संपन्न ही क्यो ना हो अगर उसमे शारिरिक या मानसिक विकृति आ गई तो दूसरे के मन मे उसके गुण नही विकृति दोष ही नजर आयेगे लेकिन उस विकृति के निवारण की जिम्मेदारी किसकी है उस वयक्ति की जिस मे वो विकृति है या उस समाज की जो उससे सहानुभूति भर रखता है ये प्रशन आपके और मेरे लिये नही है वरन आज की हिँदुत्तव के लिये है जिसे हिँदू समाज ने विकृत कर दिया और ये विकृति कई वर्षो से चमगादड़ कि तरह चिपकी हिँदुत्तव का खून चूस रही है वर्षो से अंधविश्रवास जातिप्रथा वैश्णव शैव एंव धार्मिकता पर ब्राहमणो का एकाधिकार वेदो को बांध कर रखना और एक दूसरे मे अपनी श्रेष्ठता सिद्ध करने जैसी भयावाह विकृतिया अब भी हिँदुत्तव पर कब्जा किये है और हिँदू एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप करने मे ही लगा है और यही कारण है हिँदुत्तव पर सेकुलरवादी हावी हो रहे है आज भी अंधिकाश हिँदू वेदो के नाम ही जानता है धर्मग्रंथो को खंगालना कोई नही चहाता जातिवाद की खाई जिसके एक और दलित खड़ा है अदिवासी खड़ा है और दूसरी और खुद को र्स्वण कहने वाले जो उन्हे अपनी ओर बुलाने मेँ हिचक रहे है तो दूसरी और मिशनरी और इस्लाम के नुंमाइदे करूणा का अमृत समान जहर बाँट रहे है और हम हंस रहे अंधविश्रवास की पट्टी बाँध कर धर्म की खिल्ली उड़ा कर इन धर्मपरिर्वतन कारियो का मनोबल बढा रहे है अगर आप हिँदुत्तव विकृति को दूर करना चहाते है तो पहले सनातन संस्कृति को अंगीकार करना होगा सनातन धर्म ही हिँदुत्तव का मूलाधार है और हर एक के जीवन का आधार भी यही बने तब ही हिँदुत्तव की विकृति दूर होगी और अंखड भारत का निमार्ण होगा जय राष्ट्रवाद जय सनातन धर्म

मंगलवार, 18 अक्टूबर 2011

लोकतंत्र का मत हथियार

भारत लोकतांत्रिक देश है जहा मत एक हथियार है जिसके सहारे हि राजनैतिक युद्ध मे विजय पाई जा सकती है और ये हथियार छुप कर ही आघात करता है कौन कटेगा ये मत का अधिकार वाला भी नही जानता बस चला भर देता है अब किसका ठिकरा फूटे ये किसे सत्ता सुंदरी का सुख उसके कर्मो और दंबगता तय करती है मत हथियार अचूक और पीड़ादाई है और अंधा भी जो रंक को भी राजा बना देता है लेकिन अब मत को आप हथियार नही कह सकते इसे मजबूरी कहे तो ठीक होगा क्योकी ये अब गांधी छाप नोटो की हवा से बहक जाता है सस्ती दारू मे घुलनशील है संसद के दलालो की कठपुतली बन जाता है लोकतंत्र का छिनालापन हर कोई देखता है ओर मुँह फेर कर सो जाता है मँहगाई के जमाने मे मत आम जरूरत की चीजो से सस्ता है हर गरीब के पास मिलता है फर्जी भी मिलता है सस्ता भी मिलता है बशर्ते लुभावने वादे होना चाहिये मत एक बार ही पड़ता है लेकिन दंश पाँच साल सहना पड़ता है पाँच साल मे कितने ही मतो की फसल तैयार हो जाती है अगर पुरानो ने मत नही दिया तो क्या नये लौँडे तो बहक ही जायेगे ओर फिर पाँच साल देश को खायेगे तुम जियो या मरो हम तो अपनी तोँद बढायेगे तुम्हारे बच्चे कुपोषण से मरे हमारे बच्चे तो पिज्जा ही खायेगे आप साल दर साल यूँ ही मत डालते जायेगे और हम भरोसा तोड़ते जायेगे- जय राष्ट्रवाद

हिँदू संगठनो का संकीर्ण दायरा

संकीर्ण दायरो मे हिँदू संगठन - भारत आदिकाल से सनातन संस्कृति और आर्यो की भूमि रही है आज जिन्हे हिँदू कहते है वे आर्य ही है जो वेद वाक्य और आस्था को सर्वोपरि मानते है लेकिन जब जब आर्यभूमी पर विदेशी हमलावर और उनकी संस्कृति ने धावा बोला तब तब सनातन धर्म खंडित हुआ और नये पंथ का विकास और हिँदू बंट गये चाण्क्य ने अंखड भारत का जो स्वपन देखा वो पूरा भी हुआ लेकिन फिर भी विदेशी संस्कृति के आक्रमण नही रूके उस समय के हिँदू और आज के हिँदू मे आज भी समानता है तब भी सोया था अब भी सोया है यूँ तो भारत मे कई हिँदु संगठन मौजूद है लेकिन कई हिँदुऔ की आंख कि किरकिरी बने है ऐसा क्यो इस पर कोई विचार नही करता इसका मुख्य कारण है हिँदू संगठनो का संकीर्ण होना हिँदू संगठन ज्यादातर राम जन्म भूमि अंखड भारत वेलेनटाईन डे का विरोध तक ही सीमित रह गया है संघ तो अपनी पूरी शक्ति के साथ सामाजिक कार्य एंव देश कार्य मे पूरी तरह इमानदार होने वावजूद आज भी हाई सोसाईटी के बुद्धी जीवी अपने बच्चो को संघ से दूर रखते है ओर ना कोई आज किसी को बंजरगी बनना है ना शिव सैनिक ये स्थति पैदा किसने की ये हमारे सामने प्रशन है और इसका उत्तर है चेतना अब हिँदू संगठनो को अपना कार्यक्षेत्र विस्तृत करना होगा और हिँदुतत्व की बुनियादी बाते हर हिँदू परिवार को समझानी होगी वेद एंव सनातन संस्कृति को समाज मे स्थापित करना होगा इसके लिये हर हिँदू संगठन हर साप्ताह सार्वजनिक रूप से हिँदू संस्कृति पर व्याखयान और संगठन का उद्देश और कार्य शैली सरलता से समझाये और युवाओ से जुड़ने को प्रोत्साहित करे और जो लोग हिँदू संगठनो मे राजनीति प्रयोग के लिये शामिल होते है उनको सदमार्ग पर लाये आज अगर हिँदू संगठन अपना जनाधार नही बढायेगे तो अंखड भारत का निमार्ण कैसे होगा आइये हम एक अंखड भारत के निमार्ण के लिये संकल्प बद्ध हो जर राष्ट्रवाद

गुरुवार, 13 अक्टूबर 2011

अब कोई प्रंशात भूषण ना बने

आज कुछ कड़वा लिँखूगा हो सकता है लोग मुझे फासीवादी कहे लेकिन फिर भी लिँखूगा क्यो की लिखने कि आजादी मिलि है मैँ आज सेकुलरी रंगे सियारो पर शब्दो के तीर चलाउगा कल एक देशभक्त ने एक देश द्रोही को पीटा मीडिया और कुछ राजनीति के दल्लो को बैठे ठाले अपने को समाजवादी चोला पहन कर गांधीवाद का प्रचार करने का मौका मिल गया मुझे लगता है कशमीर को भारत नही मानते सेकुलरवादी जब प्रँशात भूषण ने कशमीर पर बयान दिया तो ना मीडिया ने उसे गलत कहा और ना ही कोई राजनैतिक विचार धारा ने विरोध किया और ना हिँ अन्ना के अंध भक्तो न कुल मिला कर ये क्या माने क्योकि मौन का अर्थ मन से स्वीकृति ही होती है मैँ फेसबुक पर जुड़े एक साल भी नही हुआ लेकिन मैँने इस मंच पर जो देशभक्ति देखी वो असल मे वो गुबार है युवाओ का जो भारत के देशद्रोही पर फूट पढता है कल प्रंशात भूषण को पीटने वाले तेजेन्दर बगघा विष्णु गुप्ता एक राम सेना के कार्यकर्ता थे और फेसबुक पर भी काफी सक्रिय और क्राँतिकार विचार रखते है उन्हे गुंडा कहना देशभक्ति का अपमान करना है क्यो की प्रंशात जी का बयान अल्पसंख्यको खुशी देने वाला थे क्यो की अन्ना टीम को अल्पसख्यको का हमदर्द बनना है लेकिन किसी ने भी प्रँशात जी का विरोध नही किया ओर परिणाम आपके सामने है अब कोई भी ऐसा बयान देने से पहले विचार करेगा