सोमवार, 3 अक्टूबर 2011
मैँ निकला हूँ
आज जिँदगी को जानने निकला हुँ आज मैँ को पहचानने निकला है अनुभवो का आइना साथ लिया है लोगो को आज यथार्थ दिखाने निकला हुँ पाप मेरे पुण्य मेरे बोझ बन गये कर्म और धर्म साथ मेरे हो गये तकदीर को फैसला सुनाने निकला हुँ रास्ते के कंट कंकड़ मोह माया बन गये ज्ञान का ले बुहारा फेरने निकला हू अब डरू क्यो मैँ मैँ से हम को मैने पहचान लिया अंह की लाश लेकर दफनाने निकला हू हँस रहे है लोग वो जो रोते नही कभी कछुये से जी रहे है आदमी वो आदमी को इंसान बनाने निकला हु गर आदमी इंसान बन जाये फिर खुदा का क्यो ले नाम भीड़ मे गुम उस भगवान को ढूँढने निकला हूँ
शुक्रवार, 30 सितंबर 2011
समय मानव और कर्म
कल
का भरोसा जो करे समझो वो काल से
डरे वर्तमान की लाठी पकड़ जो चले
काल उससे डरे मत उलझ तू जीवन के जंजाल मे एक धोखा है ये जीवन मृत्यु अटल है जोड़ा बहुत तोड़ा बहुत अब तो संभल जा तेरे लिये इक कफन ही बहूत है पुण्य के सलिल मे पाप का आज तर्पण कर दो दिनो के यौवन के बाद बाट जोहता तेरा जर संभल कर चल कौन जाने कैसा होगा तेरा कल साथ तेरे जो खड़े वे तो पुतले छाया के लोभी लालची वर है तेरी माया के दीन दुखियो मे ढूंढ जरा नारायण को जो लिया था चुका दे उस सृष्टि कर्ता के ऋण को भाग मत उस तिमिर से जो विषमता से बना आग कि लपटो मे सिक स्वर्ण कुंदन बना लड़ ले आज समय से जीत जा ये रण जाग जा वरना मृत्यु कर लेगी वरण
का भरोसा जो करे समझो वो काल से
डरे वर्तमान की लाठी पकड़ जो चले
काल उससे डरे मत उलझ तू जीवन के जंजाल मे एक धोखा है ये जीवन मृत्यु अटल है जोड़ा बहुत तोड़ा बहुत अब तो संभल जा तेरे लिये इक कफन ही बहूत है पुण्य के सलिल मे पाप का आज तर्पण कर दो दिनो के यौवन के बाद बाट जोहता तेरा जर संभल कर चल कौन जाने कैसा होगा तेरा कल साथ तेरे जो खड़े वे तो पुतले छाया के लोभी लालची वर है तेरी माया के दीन दुखियो मे ढूंढ जरा नारायण को जो लिया था चुका दे उस सृष्टि कर्ता के ऋण को भाग मत उस तिमिर से जो विषमता से बना आग कि लपटो मे सिक स्वर्ण कुंदन बना लड़ ले आज समय से जीत जा ये रण जाग जा वरना मृत्यु कर लेगी वरण
गुरुवार, 29 सितंबर 2011
एक कोशिश गजल लिखने कीएक कोशिश गजल लिखने की
जी रहे है उस आस मे जब अंधेरा साथ छोड़ देगा जब चलेगे उजाले की और जमाना साथ छोड़ देगा मंजिलो की तलाश मे दूर बहुत निकल आया हुँ मै करता नही कभी कशति पर भरोसा क्योकी किनारा साथ छोड़ देगा अब शिकायत क्या करे हम वो खुद गुनाहागार थे दिखा कर रोशनी मोहबब्त की फिर अंधेरो मे छोड़ देगा गम की दहलीज पर रख कदम वक्त से लड़ने लगे आज भले वो साथ मेरे कल भँवर मे छोड़ देगा लड़ रहे थे दो मुसाफिर बस एक इमान पर जो कराता था सुलह इनमे खुद घरौँदे तोड़ देगा
सोमवार, 26 सितंबर 2011
उजाले की ओर
उजाले की ओर
चला हूँ आतीत के अंधेरे भी साथ है रात
तो काली है पर तारे मेरे साथ है कोई
भले कहे कुछ रोशनी ले लो पर मुझे
मालूम है कल पूनम की रात है
डरता नही हुँ विपत्तियो के प्रेतो से
मेरा संकल्प अब भी मेरे साथ ह छोड़ने को आतुर है मेरा अनुभव साथी किस्मत की अब ये औकात मेरे मानस को आँख दिखाती पूजता था अब तलक जिन पत्थरो को वो पत्थर ही बने रहे लेकिन सौतन श्रद्धा अब भी मन से नही जाती कुछ हँस रहे है देख कर जो वासना के पति है माया जिनके खोखले दिलो मे बरसो से डटी है मैरे साथ हो लो जीवन का रस मिलेगा पर याद रख आखिर दोजख मे ही जलना पड़ेगा ये देख कर ही आँख मेरी बंद है और चला जा रहा हुँ नये उदय की और कहीँ मिली मानवता तो कहुगा ढूँढ ले नया ठौर
चला हूँ आतीत के अंधेरे भी साथ है रात
तो काली है पर तारे मेरे साथ है कोई
भले कहे कुछ रोशनी ले लो पर मुझे
मालूम है कल पूनम की रात है
डरता नही हुँ विपत्तियो के प्रेतो से
मेरा संकल्प अब भी मेरे साथ ह छोड़ने को आतुर है मेरा अनुभव साथी किस्मत की अब ये औकात मेरे मानस को आँख दिखाती पूजता था अब तलक जिन पत्थरो को वो पत्थर ही बने रहे लेकिन सौतन श्रद्धा अब भी मन से नही जाती कुछ हँस रहे है देख कर जो वासना के पति है माया जिनके खोखले दिलो मे बरसो से डटी है मैरे साथ हो लो जीवन का रस मिलेगा पर याद रख आखिर दोजख मे ही जलना पड़ेगा ये देख कर ही आँख मेरी बंद है और चला जा रहा हुँ नये उदय की और कहीँ मिली मानवता तो कहुगा ढूँढ ले नया ठौर
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