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शनिवार, 17 सितंबर 2011

फेसबुक के युवाओ के लिये एक संदेश

फेसबुक पर भी टी आर पी का कीड़ा लग गया शायद तभी ग्रुप पे ग्रुप बनाये जा रहै है और दोस्तो को जोड़ने का अनुरोध किया जा रहा है ग्रुप मे सदस्य संख्या को लेकर खीचतान मची है जो देश को सवारने और समाज सुधार की बाते करते है वे ये सब छोड़ कर एकता समूह क्यो नही बनाते अब मुठ्ठी बाँधने का समय आ गया है आओ हम सब एक हो जाये हमारे विचार एक हो जाये आओ भारत का निमार्ण करे एक क्रांति का आह्वान करे अंखड भारत का निमार्ण कर जय राष्ट्रवाद
मैँ ना कांग्रेस को जानता हू ना भाजपा को लेकिन नंरेन्द्र मोदी को पहचानता हुँ जो कांग्रेस कि नजरो मे सिर्फ एक दंगाई है लेकिन गुजरात की जनता ने उन्हे गुजरात का दंबग बना दिया गुंजरात मे पिछले दशक जो साँप्रदायिक स्हाई से जो अध्धाय लिखा वो आज बेबुनियाद है विकास पथ पर दौड़ते गुजरात मे गुजरात भले ही भूल चुका है लेकिन कुछ कट्टरपंथी मुस्लमानो और गुजरात मे अपनी राजनितिक जमीन खोति कांग्रेस अब भी गोधरा कांड को जलता चूल्हा मानकर तवा चढाने को तैयार है जब्की सुप्रीम कोर्ट पानी डाल चुकि है अब चाहे कांग्रेस बुझे चूल्हे मे अनशनी फूँक मारे लेकिन आग नही जलेगी क्योकी गुजरात को एक दिशा देने वाला दीपक भी सदभाव का उजाला लेकर बैठा है और यह एक फाँस कि तरह काँग्रेस को चुभ रहा है पर पता नही शंकरसिँह बाघेला रूपी काँटा फाँस निकाल पाता है या नही अगर देखा जाय तो नरेन्द्र मोदी इमानदार है क्यो की गोधर काँड के बाद भी पूर्ण बहुमत ये सिद्ध करता है की काँग्रेस भरोसे मँद नही भुज के भूँकप मे गुजरात मिट गया लेकिन मोदी कि इच्छाशक्ति ने और गुजरात को विकसित कर दिया जब्कि कांग्रेस की झोली मे गुजरात के लिये कोई उपल्बधी नही है आज जब सदभाव को लेकर उपवास किया जा रहा है तो काँग्रेस मीडिया का सहारा लेकर इस अनशन को ढोँग और जनता को छल बता रही है लगता है मीडिया भी बिक ग ई है तभी तो सांप्रदायिक हिँसा विधेयक का समर्थन कर रही ही है और मोदी जी सदभाव के लिये अनशन अब जनता कि बारी जनता बताये कौन सच्चा कौन झूठा

मंगलवार, 13 सितंबर 2011


सिँतबर आ गया और शासकिय कार्यालय तैयार है हिँदी दिवस मनाने के लिये या आप ये भी कह सकते है ये श्रद्धाँजली दिवस हैँ क्योकी कांन्वेट दड़बो मे पढते गले मे टा ई लटकाये आज के अ सभ्य समाज हिँदी दिवस जानते ही नही उनके लिये तो अंलग सगी है और हिँदी एक विषय मात्र भर है आज हिँदी का स्तर अंग्रेजी के नीचे है और हम गर्व से कहते है यह हमारी राष्ट्रभाषा है क्या सिर्फ हिँदी पखवाड़ा मना कर या हिँदी दिवस को याद कर हिँदी को मुकाम दिलवा पायेगे हरगिज नही क्योकि हिँदी हमारी आत्मा मे नही बसी है बल्की वह हमारे चेहरे पर पाउडर जैसी पुति हुई है जो विदेशीयो के सामने आपको सम्मान दिलाती है आप भारत का प्रतिनिधित्तव करते है लेकिन अपनी हिँदी को भूल जाते है वैसे तो हम विकास रुपी ढोल खूब पीट रहे है लेकिन शर्म इस बात पर भी आना चाहिये की संयुक्त राष्ट्रसंघ मे हिँदी को सम्मान नही दिला सके आज वेलेनटाईन डे मदर डे और ना जाने कितने डे युवा मनाता है लेकिन हिँदी की गरिमा क्या है महिमा क्या है साहित्य क्या है ये कभी जानने कि चेष्टा करता क्योकी हिँदी आत्मा मे नही है हम आज अपनी जड़े खोदने पर तुले है क्यो कि हम शिक्षा के नाम पर अंग्रेजीयत अपनाते जा रहे है हर सरकारी काम हिँदी मे होना चाहिये लेकिन अफसर को हिँदी नही आती हद तो जब होती है कोई विदेश मँत्रि भारत आते है तो प्रेस वार्ता भी अंग्रेजी मे ही होती है अगर हिँदी का ये हाल रहा तो हिँदी का मरण हमलोगो के द्वारा हो जायेगा फिर अंग्रेजी हम पर हंसेगी और भारत माता कहेगी हिँदी मेरी बहना रुठ ग ई जो थी भारत क गहना जय हिँद

सोमवार, 12 सितंबर 2011

जाकिर का अंधा इस्लाम प्रेम


मैँने मुस्लिम विद्वान जाकिर नाईक कि काफी तकरीरे सुनी है ओर आपने भी सुनी होगी वे जिस तरह इस्लाम को महिमामंडित करते है तो हरकोई आर्कषित हो जाता है जाकिर जो कहते है वो कुरान और हदीस पर आधारित होता है अब ये कितने असरदार है ये हमे तब लगता है जब कोई आंतकि गुट कही विस्फोट कर देता है और इस्लाम के प्रति हमारा भ्रम टूट जाता है लेकिन बात यहाँ खत्म नही होती जब जाकिर हिँदू धर्म की तुलना कर इस्लाम और हिँदू धर्म मे समानता बताते है तो लगता है उसे नीचा दिखा कर उसमे छिपी इस्लाम विपिरत बाते द्वारा हिँदूऔ के मन मे अपने धर्म के प्रति शंका और इस्लाम का प्रति आस्था के भाव पैदा कर देते है ऐसा लगता है जैसे हिँदू धर्म की पोथिया चाट कर आये है आस्था से पढ कर नही आये जाकिर हिन्दू धर्म कि मान्यताओ कि काट इस्लाम मे तर्क के साथ पेश करते है चाहे गौ हत्या हो या मूर्ति पूजा या फिर हमारे अवतार जबकि हिँदू धर्म सभी धर्मो का पितामाह है लेकिन जाकिर कहते है मुसलमानो अपने बाप को बाप मत कहो (हिँदू धर्म काफिर है) आज जितनी भी आंतकि घटानाये होती है अंधिकाश मुस्लिम वर्ग पर हि शामिल होता हे लेकिन जाकिर इन पर भी यह सफाई देता है कुछ मुस्लमान आंतकी है लेकिन दूसरे धर्म इनसे कहीँ ज्यादा आतकीँ है ये कथन इस्लामिक आंतकके पक्ष को और मजबूत करता है जब्की जाकिर को इस्लामिक आंतकवाद का खुल कर विरोध करना चाहिये जाकिर इस्लाम का झंडे तले शायद सबको खड़ा करने की सोच रहे है और भारत मे इस्लामिक राष्ट्र कि नीँव को रखने का प्रयास कर रहे है पीस टीवी पर इनके कार्यक्रमो पर रोक ल गना चाहिये जय भारत मात.