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शुक्रवार, 19 अगस्त 2011

गांधी जी का हिँदुवाद और कांग्रेस गांधी जी का हिँदुवाद और कांग्रेस

मैँ आज उस विषय को आप तक पहुचा रहा हू जो गांधीवादी पुच्छले संघ को फासीवादी और हिन्दुत्व को साप्रदायिक कह कर हमारी सनातनी रूपी परपंरा वृक्ष की डालिया काट रहे है जिस पर वे स्वंम भी बैठे है और समाजवाद का भोंपू लेकर चिल्ला चिल्ला कर लोगो को हम से बचने को कहते है मा गांधी की हत्या एक आक्रोश था जिसे सत्ता के लालची दलालो ने संघ के मत्थे मढ दिया और अगर गांधी जी की विचार धारा कांग्रेस समझे तो गांधी जी हिन्दुत्व की भावना रखते थे चूँकि आजादी की लड़ाई मे कांग्रेस मे जनसर्मथन उबाल पर था और परिस्थितयाँ काग्रेस के पक्ष मै थी इस लिये संघ से बापू और काग्रेस से किनारा कर लिया होगा लेकिन 1947 के बाद बापू का ये कहना कांग्रेस को खत्म कर दिया जाये ये उस और इंगित करता है बापू भी संघ की विचार धारा से सहमत थे लेकिन कांग्रेस ने सत्तालोलुपता के चलते गाँधी के उस विचार को नकार दिया बापू की हर सही गलत बात को सत्य मानने वाली काग्रेस ने उनके विचारो का आदर नही किया और मासूम जनता को अपने लिये राजी कर लिया ऐसी कांग्रेस के प्रति हम आज भी आस्था रखे है ये हर भारतीय को सोचना चाहिये

आजाद भारत गुलाम इंडिया

अब मै आजाद हु ये मै नही मेरा भारत कहता है लेकिन मै फिर भी गुलाम हु ये इंडिया कहता है मै गाँवो मेँ बसता हु बैलो की घंटीयो मे मन रमा है भूमिपुत्रो की हर श्वास मै हू मै आजाद हु पर क्या करु मेरा एक ओर नाम जिसको टाई धारी इंडिया कहते है वो अपने को दासता मे जीना पंसद करता है क्यो कि वह फटेहाल मेरे बच्चो को देख कर मुँह बिचकाता है मेरी भाषा मे बात करने वालो से कन्नी काटता है उसे गोरो की काली जबान पंसद है ये मेरा इंडिया है जो को एड अंग्रेजी शिक्षा पढता है अपने जिँदा बाप को मरा हुआ कहता है और अपने संस्कारो मे शर्म महसूस करता है और सदा इस आशा मे लगा रहता है पढाई के बाद गोरो की गुलामी करूगा ये मेरा गुलाम इंडिया है मै वो भारत हुँ जो अब झोपड़ पट्टी और मध्यम वर्गिय दड़बो मे रहता हु ओर ये इंडिया महल अटारी मै बैठा मेरा मजाक उड़ाता है और इंन्ही अटारियो मे रेव पार्टीयो के जश्न मे मद मे चूर धुँआ उड़ाता इंडिया अपने को 21 वी सदी का उगता सूरज बता रहा है ये इंडिया सचमुच गुलाम है लेकिन मै आजाद हु क्योकी मेरे लोकतंत्र यज्ञ की आहुति देने जब कोई कमजोर पिछड़ा जाता है तो मैरे प्रति आदर और अपने लिये उम्मीद लिये जाता है और फिर ये इंडिया उसकी उम्मीद के आगे ना लगा देता है क्यो की ये गोरो का इंडिया है खुली हवा 64 साल हो गये मुझे और इंडिया को लेकिन मैँ बिमार और थका सा हो गया हु ओर इंडिया यंग होता जा रहा है मेरे जीवन के सारे वंसत वेलेनटाईन डे ने छीन लिये है ओर मेरे सारे मित्र भी एक दिन के लिये सिमट कर रह गये है ये इंडिया मुझे कही का नही छोड़ेगा मेरा जो डंका विश्रव मै बजता था अब ये इंडिया फिर से गोरो को बेच देगा क्या तुम मुझको बचा लोगे
bk

गुरुवार, 18 अगस्त 2011

अन्ना के पीछे मीडियावादी लोकतंत्र ओर जेपीअन्ना के पीछे मीडियावादी लोकतंत्र ओर जेपी

bkआज हर कोई गला फाड़ चीख रहा है भ्रष्टाचार मिटाओ जनलोकपाल लाओ ये लोकतंत्र की आवाज कतई नही है ये मीडिया वादी लोगो का वो जत्था है जो आंदोलन की आड़ मे सिर्फ अपना चेहरा प्रसारित करवा रहे है केवल मुठ्ठी भर लोग ही है जो देश का असली मर्म समझते है एक अन्ना के पीछे हो लेना आदोलन नही है बात तब बनती अन्ना का सबके साथ होना अन्ना का ये परहेज मुझे समझ नही आया अन्ना की रामदेव व गैर काग्रेसी दलो से दूरी का ये अभिप्राय भी माना जा सकता है की सिविल सोसायटी कही खुद राजनैतिक मंच ना बन जाये 65 वर्षो से हम जूझते ही आ रहे है अगर आकलन किया जाय तो भ्रष्टाचार ही नही नक्सलवाद कालाधन नौकरशाही लालफिता शाही ओर अन्य क ई विकट ओर भयानक समस्याऐ है लेकिन इस ओर ना लोक समाज झुका और ना ही कोई अन्ना और आज की परिस्थिति एसी है अधिकाश को पता ही नही जन लोकपाल बिल है क्या (ndtv india मै अभिज्ञान लोगो से जनलोकपाल क्या है पूछ रहे थे) ओर अन्ना के समर्थन कर रहे थे यह कैसा जन आंदोलन है मै जेपी और लोहिया के आंदोलनो को जन आंदोलन मान सकता है जो उन्होने किया अन्ना ने तिल भर भी नही कीया जेपी के आंदोलन ने लोकतंत्र की आँखो से वो विश्वास की पट्टी हटाई जो काँग्रेस ने आजादी के बाद बाँध दी थी जेपी के आदोलन की सफलता बिना मीडिया या बिना किसी सिविल सोसायटि ओर मुठ्ठी भर युवाओ कि ललकार ने सत्ता को पलट कर रख दिया आज के युवाओ का आदर्श अन्ना बन गये ओर जेपी को आपातकाल के बाद हम भूल गये और उन्हे हमने किताबो ओर बुतो मे दफन कर दिया आज के युवाओ को ये भी नही पता होगा ये जेपी कौन है आज जेपी होते तो आंदोलन सफल ही नही प्रभावशील भी होते अब तो लोकतत्र को जाग जाना चाहिये क्योकी समस्याऐ गंभीर सरकार तानाशाह ओर हम लाचार हो गये है जय भारत