Zee News Hindi: Latest News

गुरुवार, 18 अगस्त 2011

अन्ना के पीछे मीडियावादी लोकतंत्र ओर जेपीअन्ना के पीछे मीडियावादी लोकतंत्र ओर जेपी

bkआज हर कोई गला फाड़ चीख रहा है भ्रष्टाचार मिटाओ जनलोकपाल लाओ ये लोकतंत्र की आवाज कतई नही है ये मीडिया वादी लोगो का वो जत्था है जो आंदोलन की आड़ मे सिर्फ अपना चेहरा प्रसारित करवा रहे है केवल मुठ्ठी भर लोग ही है जो देश का असली मर्म समझते है एक अन्ना के पीछे हो लेना आदोलन नही है बात तब बनती अन्ना का सबके साथ होना अन्ना का ये परहेज मुझे समझ नही आया अन्ना की रामदेव व गैर काग्रेसी दलो से दूरी का ये अभिप्राय भी माना जा सकता है की सिविल सोसायटी कही खुद राजनैतिक मंच ना बन जाये 65 वर्षो से हम जूझते ही आ रहे है अगर आकलन किया जाय तो भ्रष्टाचार ही नही नक्सलवाद कालाधन नौकरशाही लालफिता शाही ओर अन्य क ई विकट ओर भयानक समस्याऐ है लेकिन इस ओर ना लोक समाज झुका और ना ही कोई अन्ना और आज की परिस्थिति एसी है अधिकाश को पता ही नही जन लोकपाल बिल है क्या (ndtv india मै अभिज्ञान लोगो से जनलोकपाल क्या है पूछ रहे थे) ओर अन्ना के समर्थन कर रहे थे यह कैसा जन आंदोलन है मै जेपी और लोहिया के आंदोलनो को जन आंदोलन मान सकता है जो उन्होने किया अन्ना ने तिल भर भी नही कीया जेपी के आंदोलन ने लोकतंत्र की आँखो से वो विश्वास की पट्टी हटाई जो काँग्रेस ने आजादी के बाद बाँध दी थी जेपी के आदोलन की सफलता बिना मीडिया या बिना किसी सिविल सोसायटि ओर मुठ्ठी भर युवाओ कि ललकार ने सत्ता को पलट कर रख दिया आज के युवाओ का आदर्श अन्ना बन गये ओर जेपी को आपातकाल के बाद हम भूल गये और उन्हे हमने किताबो ओर बुतो मे दफन कर दिया आज के युवाओ को ये भी नही पता होगा ये जेपी कौन है आज जेपी होते तो आंदोलन सफल ही नही प्रभावशील भी होते अब तो लोकतत्र को जाग जाना चाहिये क्योकी समस्याऐ गंभीर सरकार तानाशाह ओर हम लाचार हो गये है जय भारत

बुधवार, 17 अगस्त 2011

ये कैसा लोकतत्र

bkआज लोकतंत्र की आरति उतारो लोकतंत्र का तिलक करो प्रशन मत करो केवल उसकी सुनो जो कहता है अब रूक ना सकेगा यह स्थिती आज पूरे देश मे बन ग ई है सरकार क्या करे क्या ना करे अन्ना आर पार करने उतरे है लेकिन सरकार भी फूँक फूँक कर कदम रख रही है रामलीला मैदान काँड को वह भूल चुकि है लेकिन एक प्रशन बाबा रामदेव का भी हम देखे काला धन वयवस्था परिवर्तन को लेकर उनका असफल और बेईज्जत भरा आदोलन को हम स्वीकार ना सके और बाबा को मैदान छोड़ना पढा जबकि इसके विपरित हम अन्ना के पीछे हो कर भूख प्यास त्याग दी ओर बुद्धिजीवी लोकतंत्र की आवाज बुँलद मान रहै अन्ना अनुभवी खिलाड़ी की भाँती सरकार से भिड़ने आये है उनकी फौज मै हर वो सैनिक है जो प्रशासन के रवैये को जानता है लेकिन इसके विपरित बाबा रामदेव का काला धन ओर अन्य मुद्दे लोकतँत्र के कमजोर रवैये की भेट चढ गये ओर बाबा खुद जाँच ऐँजेसी के शिँकजे मे फँस गये और हम चुप बैठ गये हमारा लोकतँत्र मीडियावादी बन कर रह गया है ह र वयक्ति अपने को मीडिया की सुर्खी बनाना चाहात है अगर अन्ना सचमुच मे भ्रष्टाचार के प्रति स्वेदनशील होते तो रामदेव और अन्ना एक मंच पर होते तो रामलीला मैदान का आँदोलन सफल होता ओर आज अन्ना को दोबारा अनशन ना करना पडता ये हमारा कैसा लोकतत्र है

मंगलवार, 16 अगस्त 2011

देश विचार

जय भारत जय सनातन तुझको मेरा प्रणाम एक हो लक्ष्य एक हो हमारा ध्यान ना कुरूतियो का दल दल हो ना हो हम धर्मभीरु ना कोई मिथक आंडम्बर हो संस्कार और संयम के भूषण जातिप्रथा का हो दूर कुपोषण एक मानवता चिर परिचित हो तृष्णा मिटे हर मातृ भूमि की हरिता ओर सिँचित हो लज्जा हो नारी मे इतनी शोशित समाज ना कर पाये वीर प्रसूता बन आज तू महापुरूष को तु फिर जाये अपने अपने पथ चुन लेना जीवन का समय अब शेष नही सियार शासन आ गया सत्य का परिवेश नही विनती है कर्णधार देश के तुम ना मुह फेर लेना देशद्रोहियो के प्राण लेना देश की आन मे प्राण देना